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मेनोपॉज़ के लक्षण: पूरी सूची जो कोई नहीं बताता

लेखिका: नंदिता, MySakhi की संस्थापक8 मिनट पढ़ने का समय

चाय का कप हाथ में है और वो कब का ठंडा हो चुका है। आप रसोई की खिड़की के पास खड़ी हैं और मन ही मन एक अजीब सी सूची बना रही हैं। कल रात मुश्किल से तीन घंटे की नींद। सुबह उठते ही एड़ियों में अकड़न। बेटे पर बिना बात के आवाज़ ऊंची हो गई। और अभी, इसी पल, याद नहीं आ रहा कि आप रसोई में आई किसलिए थीं।

हर बात अलग से देखें तो छोटी लगती है, इसलिए आप किसी से कहती भी नहीं। पर क्या हो अगर ये सब एक ही कहानी के हिस्से हों, और उस कहानी का नाम मेनोपॉज़ हो?

संक्षेप में: मेनोपॉज़ के लक्षण सिर्फ़ हॉट फ्लैश नहीं हैं। इनमें पीरियड्स का बदलना, रात को पसीना, नींद टूटना, चिड़चिड़ापन, घबराहट, उदासी, भूलना, थकान, जोड़ों का दर्द और त्वचा व बालों के बदलाव भी आते हैं। करीब 4 में से 3 औरतों को हॉट फ्लैश या रात का पसीना होता है। ज़्यादातर औरतें 45 से 55 की उम्र के बीच मेनोपॉज़ तक पहुंचती हैं।

मेनोपॉज़ और पेरिमेनोपॉज़ में क्या फ़र्क है?

मेनोपॉज़ का मतलब है लगातार 12 महीने तक पीरियड न आना। ये एक पड़ाव है, एक तारीख़ जो पीछे मुड़कर ही पता चलती है। उससे पहले के साल पेरिमेनोपॉज़ कहलाते हैं, और ज़्यादातर लक्षण यहीं से शुरू होते हैं। पेरिमेनोपॉज़ औसतन करीब 4 साल चलता है, पर किसी के लिए ये कुछ महीनों का होता है और किसी के लिए 10 साल तक का।

भारत में हुई स्टडीज़ अक्सर बताती हैं कि यहां मेनोपॉज़ की औसत उम्र थोड़ी पहले, करीब 46 से 47 साल होती है। यानी 40 के आसपास ही बदलाव शुरू हो जाएं, तो इसमें कुछ अनोखा नहीं। ये दौर कैसे शुरू होता है, ये जानने के लिए पेरिमेनोपॉज़ क्या है और इसके शुरुआती संकेत पढ़िए।

एक बात और। आपको हर लक्षण होना ज़रूरी नहीं। किसी को दो-तीन होते हैं, किसी को बहुत सारे। ये कोई इम्तिहान नहीं है जिसमें पास या फ़ेल होना हो। आपका अनुभव जैसा भी है, वो सच है।

गर्मी की लहरें: हॉट फ्लैश और रात को पसीना

ये सबसे जाना-पहचाना लक्षण है। अचानक छाती से गर्दन और चेहरे तक गर्मी चढ़ती है। चेहरा लाल, माथे पर पसीना, दिल थोड़ा तेज़। कुछ देर में लहर उतर जाती है, पर पीछे थकान छोड़ जाती है, और कभी-कभी कंपकंपी भी। यही लहर रात में आए, तो उसे रात का पसीना कहते हैं, और नींद वहीं टूट जाती है।

अमेरिका में बरसों चली स्वान स्टडी में हॉट फ्लैश के चलने का बीच का आंकड़ा करीब 7 साल रहा। ये सुनकर घबराहट हो सकती है, पर इसका एक मतलब ये भी है कि आप कुछ गलत नहीं कर रहीं, और ये कोई ऐसी चीज़ नहीं जो "कुछ हफ़्तों में ठीक हो जानी चाहिए"। इसके लिए मदद लेना ठीक है।

रसोई में खड़े-खड़े लहर आए, तो अचानक गर्मी लगने पर 60 सेकंड की सांस आज़माइए। रात को भीगकर नींद खुले, तो रात को पसीना आने पर 5 मिनट का तरीका आपके काम आ सकता है।

पीरियड्स में बदलाव: जब कैलेंडर पर भरोसा न रहे

पेरिमेनोपॉज़ का सबसे पहला संकेत अक्सर यही होता है। पीरियड्स जल्दी-जल्दी आने लगते हैं, या दो महीने तक आते ही नहीं। कभी बहाव बहुत हल्का, कभी पहले से ज़्यादा। पर्स में हर समय एक पैड रखना ज़रूरी लगने लगता है।

कुछ बातें इंतज़ार नहीं कर सकतीं। बहुत ज़्यादा ब्लीडिंग हो, दो पीरियड्स के बीच ब्लीडिंग हो, या मेनोपॉज़ के बाद किसी भी तरह की ब्लीडिंग हो, तो डॉक्टर को ज़रूर दिखाइए। क्या सामान्य है और क्या नहीं, ये 40 के बाद पीरियड्स अनियमित होने वाले लेख में विस्तार से है।

नींद: जब रातें लंबी हो जाएं

शरीर थका हुआ है, फिर भी नींद नहीं आती। या नींद आती है, पर रात 2 या 3 बजे खुल जाती है, और फिर छत ताकते-ताकते सुबह हो जाती है। कभी वजह रात का पसीना होता है, कभी दौड़ता हुआ मन, और कभी कोई वजह समझ ही नहीं आती।

लंबे समय से चली आ रही अनिद्रा के लिए सीबीटी-आई, यानी नींद के लिए सोच और दिनचर्या पर काम करने वाली थेरेपी, सबसे पहले सुझाया जाने वाला इलाज है। अगर हफ़्तों से नींद ठीक नहीं है, तो डॉक्टर से इसके बारे में पूछिए। तब तक, नींद न आने पर क्या करें में सोने से पहले की एक छोटी सी दिनचर्या है।

मन: चिड़चिड़ापन, घबराहट और उदासी

छोटी सी बात पर आंखें भर आना। बिना वजह दिल घबराना। ऐसा गुस्सा, जो बाद में खुद को ही हैरान कर दे। बहुत सी औरतें इन बदलावों को मेनोपॉज़ से जोड़ती ही नहीं, और सोचती हैं कि शायद उनका स्वभाव ही बिगड़ गया है।

स्वान स्टडी ने ये भी पाया कि पेरिमेनोपॉज़ के दौरान उदासी और डिप्रेशन के लक्षणों का खतरा 2 से 4 गुना तक बढ़ जाता है। यानी आप कमज़ोर नहीं हैं। आपका शरीर एक बड़े बदलाव से गुज़र रहा है, और मन भी उसी शरीर का हिस्सा है। गुस्से के लिए मेनोपॉज़ में गुस्सा और चिड़चिड़ापन और घबराहट के लिए पेरिमेनोपॉज़ में घबराहट पढ़ सकती हैं।

अगर उदासी हफ़्तों तक बनी रहे, तो डॉक्टर से बात कीजिए। ब्रिटेन की मेनोपॉज़ गाइडलाइन में सीबीटी को मेनोपॉज़ से जुड़े उदास मन के लिए एक विकल्प माना गया है। और अगर कभी खुद को नुकसान पहुंचाने के ख़याल आएं, तो अभी, इसी वक्त अपने इलाके की इमरजेंसी सेवा या किसी क्राइसिस हेल्पलाइन से संपर्क कीजिए। आप अकेली नहीं हैं।

दिमाग: भूलना और ब्रेन फॉग

नाम ज़बान पर है, पर निकल नहीं रहा। चाबी फ्रिज में मिलती है। एक ही बात दो बार पूछ लेती हैं। कई औरतें इसे लेकर डर जाती हैं, और ये डर समझ में आता है।

पेरिमेनोपॉज़ में ये धुंध आम है, और नींद की कमी इसे और गाढ़ा कर देती है। इसके बारे में और जानना हो, तो मेनोपॉज़ में भूलना और ब्रेन फॉग पढ़िए। पर अगर भूलना तेज़ी से बढ़ रहा हो, या रोज़ के काम मुश्किल होने लगें, तो डॉक्टर को ज़रूर बताइए।

शरीर: जोड़ों का दर्द, थकान, धड़कन और सिरदर्द

शरीर भी अपनी भाषा में बताता है कि कुछ बदल रहा है:

  • जोड़ों में दर्द और सुबह की अकड़न, खासकर उंगलियों, घुटनों और एड़ियों में
  • ऐसी थकान, जो सोकर भी नहीं जाती
  • पेट के आसपास वज़न बढ़ना
  • दिल की धड़कन अचानक तेज़ हो जाना
  • सिरदर्द, जो पहले से अलग लगे
  • पेट फूलना और भारीपन

इनमें से कुछ बातें तुरंत ध्यान मांगती हैं। सीने में दर्द, बेहोशी, सांस फूलना, या ऐसी धड़कन जो शांत ही न हो, तो तुरंत इमरजेंसी मदद लीजिए। अचानक बहुत तेज़ सिरदर्द, नज़र में बदलाव, कमज़ोरी या उलझन हो, तब भी तुरंत। और अगर पेट फूलना लगातार बना रहे, तो डॉक्टर से जांच ज़रूर करवाइए।

हर लक्षण पर अलग से बात की गई है: जोड़ों का दर्द और सुबह की अकड़न, हर समय थकान, दिल की धड़कन अचानक तेज़ होना और पेट के आसपास बढ़ता वज़न।

त्वचा, बाल और वो बातें जो हम ज़ोर से नहीं कहतीं

शीशे में त्वचा रूखी दिखने लगती है, बाल पतले होने लगते हैं। और कुछ बदलाव ऐसे हैं जिनके बारे में हम सहेलियों से भी फुसफुसाकर बात करती हैं: योनि में सूखापन, नज़दीकी के पलों में दर्द, बार-बार पेशाब जाने की ज़रूरत, या इच्छा का कम हो जाना।

इनके बारे में डॉक्टर से बात करना बिल्कुल ठीक है। इनमें शर्म की कोई बात नहीं। शीशे वाले बदलावों पर शीशे में वो औरत एक नरम सी बातचीत है।

मेनोपॉज़ के लक्षणों के लिए डॉक्टर को कब दिखाएं?

आपको सब कुछ अकेले नहीं संभालना है। डॉक्टर से बात कीजिए, अगर:

  • 40 से पहले पीरियड्स रुक जाएं। इसे प्रीमैच्योर ओवेरियन इनसफ़िशिएंसी कहते हैं, और ये करीब 100 में से 1 औरत को होता है।
  • 45 से पहले मेनोपॉज़ के संकेत दिखें, जिसे जल्दी मेनोपॉज़ माना जाता है
  • लक्षण आपकी नींद, काम या रिश्तों पर भारी पड़ने लगें
  • ब्लीडिंग ऊपर बताए किसी खतरे वाले तरीके से हो
  • मन हफ़्तों तक भारी रहे

कई औरतों के लिए हॉर्मोन थेरेपी हॉट फ्लैश का सबसे असरदार इलाज है। ये फ़ैसला आपके और आपके डॉक्टर के बीच की बातचीत है। डॉक्टर के पास क्या लेकर जाएं, इसके लिए डॉक्टर से मेनोपॉज़ के बारे में कैसे बात करें में एक तैयार सूची है।

अभी आज़माएं: तीन लाइनें, तीन सांसें

आपको आज रात ये पूरी सूची याद रखने की ज़रूरत नहीं। आपको बस तीन लाइनें और तीन सांसें चाहिए।

  1. सोने से पहले किसी भी कागज़ पर तीन लाइनें लिखिए: आज शरीर में क्या महसूस हुआ, मन कैसा रहा, और किस चीज़ से थोड़ा आराम मिला।
  2. कागज़ एक तरफ़ रखिए और एक हाथ छाती पर रखिए।
  3. नाक से धीरे सांस लीजिए, और मुंह से उससे थोड़ी लंबी सांस छोड़िए। ऐसे तीन बार।
  4. मन में कहिए: "आज जो भी हुआ, उसे यहीं रख देती हूं।"

दो हफ़्ते बाद आपके पास एक छोटी सी डायरी होगी, जो डॉक्टर के पास ले जाने के काम आएगी। और हर रात की तीन सांसें सिर्फ़ आपकी होंगी। इसे गलत करने का कोई तरीका नहीं है।

अगर आज रात मन भारी है, तो सखी से बात कीजिए। बस बताइए कि आप कैसा महसूस कर रही हैं, और वो उस पल के लिए कोई सांस का अभ्यास, नींद की कहानी या संगीत सुझाएगी। सखी डॉक्टर नहीं है, पर वो सुनती है, और हिंदी में भी। हिंदी गाइडेड अभ्यास हिंदी लाइब्रेरी में मुफ़्त हैं।

5 मिनट। कोई चटाई नहीं। कोई मंत्र नहीं। बस आप।

महिलाएं अक्सर पूछती हैं

मेनोपॉज़ के सबसे आम लक्षण कौन से हैं?+

हॉट फ्लैश, रात को पसीना, पीरियड्स का अनियमित होना, नींद की परेशानी, चिड़चिड़ापन, घबराहट, भूलना, थकान और जोड़ों का दर्द सबसे आम हैं। करीब 4 में से 3 औरतों को हॉट फ्लैश या रात का पसीना होता है।

मेनोपॉज़ के लक्षण किस उम्र में शुरू होते हैं?+

लक्षण अक्सर पेरिमेनोपॉज़ में, यानी मेनोपॉज़ से कुछ साल पहले शुरू होते हैं। ज़्यादातर औरतें 45 से 55 के बीच मेनोपॉज़ तक पहुंचती हैं, और भारत में हुई स्टडीज़ में औसत उम्र अक्सर करीब 46 से 47 बताई जाती है।

मेनोपॉज़ के लक्षण कितने साल तक रहते हैं?+

हर औरत के लिए अलग। पेरिमेनोपॉज़ औसतन करीब 4 साल चलता है, और अमेरिका की स्वान स्टडी में हॉट फ्लैश के चलने का बीच का आंकड़ा करीब 7 साल रहा।

क्या मेनोपॉज़ में घबराहट और उदासी होना सामान्य है?+

हां, ये आम है। स्वान स्टडी में पेरिमेनोपॉज़ के दौरान डिप्रेशन के लक्षणों का खतरा 2 से 4 गुना ज़्यादा पाया गया। उदासी हफ़्तों तक रहे, तो डॉक्टर से बात कीजिए।

मेनोपॉज़ के लक्षणों के लिए डॉक्टर को कब दिखाएं?+

जब लक्षण नींद, काम या रिश्तों पर असर डालें, 40 से पहले पीरियड्स रुक जाएं, या बहुत ज़्यादा ब्लीडिंग, दो पीरियड्स के बीच ब्लीडिंग या मेनोपॉज़ के बाद कोई भी ब्लीडिंग हो।

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