40 के बाद पीरियड्स अनियमित: क्या सामान्य है, कब डॉक्टर से मिलें
अगले हफ़्ते भतीजी की शादी है। लहंगा सिल गया है, हल्दी की पीली साड़ी भी तय है। पर एक सवाल मन से जा ही नहीं रहा: अगर उसी दिन पीरियड आ गया तो? पिछली बार 18 दिन में आ गया था, उससे पहले पूरे 50 दिन बाद। अब तो रसोई के कैलेंडर पर निशान लगाना भी बेकार लगता है।
पर्स में पैड, बैग में एक जोड़ी कपड़े, और मन में हल्की सी घबराहट। सब साथ चलते हैं। अगर ये आपकी कहानी है, तो सबसे पहले ये जान लीजिए कि आप अकेली नहीं हैं।
संक्षेप में: 40 के बाद पीरियड्स अनियमित होना अक्सर पेरिमेनोपॉज़ का पहला संकेत होता है। चक्र छोटा या लंबा हो सकता है, कभी पीरियड छूट सकता है, और बहाव बदल सकता है। पर बहुत ज़्यादा ब्लीडिंग, दो पीरियड्स के बीच ब्लीडिंग, या मेनोपॉज़ के बाद किसी भी तरह की ब्लीडिंग हो, तो डॉक्टर से ज़रूर मिलें।
40 के बाद पीरियड्स अनियमित क्यों होते हैं?
पेरिमेनोपॉज़ में अंडाशय, यानी ओवरी, हर महीने एक जैसा काम नहीं करते। हॉर्मोन एक महीने ऊपर, अगले महीने नीचे। इसीलिए चक्र भी डगमगाने लगता है। ये दौर औसतन करीब 4 साल चलता है, पर कुछ महीनों से लेकर 10 साल तक भी हो सकता है।
ज़्यादातर औरतें 45 से 55 की उम्र के बीच मेनोपॉज़ तक पहुंचती हैं, और भारत में हुई स्टडीज़ अक्सर औसत उम्र करीब 46 से 47 बताती हैं। तो 40 के दशक की शुरुआत में ही बदलाव दिखना कोई अनोखी बात नहीं। इस दौर को समझने के लिए पेरिमेनोपॉज़ क्या है पढ़िए।
पेरिमेनोपॉज़ में क्या सामान्य है?
इस दौर में ये बदलाव बहुत आम हैं:
- पीरियड्स का पहले से जल्दी-जल्दी आना
- एक-दो महीने पीरियड न आना, और फिर अचानक आ जाना
- बहाव कभी बहुत हल्का, कभी पहले से कुछ ज़्यादा
- पीरियड के आसपास नींद और मूड का ज़्यादा बिगड़ना
- पीरियड्स के साथ गर्मी की लहरें या रात का पसीना
मेनोपॉज़ तब माना जाता है जब लगातार 12 महीने तक पीरियड न आए। उससे पहले, दो-तीन महीने का अंतराल आकर फिर पीरियड आ जाना भी इसी दौर का हिस्सा है। यानी 10 महीने बाद पीरियड आया, तो गिनती फिर से शुरू होती है।
40 के बाद अनियमित पीरियड्स में डॉक्टर से कब मिलें?
कुछ संकेत "उम्र का असर" कहकर टालने लायक नहीं हैं। इनमें से कुछ भी हो, तो डॉक्टर को दिखाइए:
- बहुत ज़्यादा ब्लीडिंग, जो आपको डराए या रोज़ के कामकाज में रुकावट बने
- दो पीरियड्स के बीच ब्लीडिंग या धब्बे
- मेनोपॉज़ के बाद, यानी 12 महीने बिना पीरियड के बाद, किसी भी तरह की ब्लीडिंग, चाहे हल्का सा धब्बा ही क्यों न हो
- 40 से पहले पीरियड्स पूरी तरह रुक जाना। इसे प्रीमैच्योर ओवेरियन इनसफ़िशिएंसी कहते हैं, और ये करीब 100 में से 1 औरत को होता है।
- 45 से पहले मेनोपॉज़ के संकेत, जिसे जल्दी मेनोपॉज़ कहा जाता है
मेनोपॉज़ के बाद की ब्लीडिंग को कभी "शायद ठीक ही होगा" मानकर मत छोड़िए। इसकी जांच ज़रूरी है।
एक बात और, जो कम बताई जाती है। जब तक मेनोपॉज़ पूरा न हो जाए, गर्भ ठहरने की संभावना पूरी तरह ख़त्म नहीं होती। अगर पीरियड देर से है और ये सवाल आपके लिए मायने रखता है, तो जांच कर लीजिए, और डॉक्टर से गर्भनिरोध के बारे में भी पूछिए।
डॉक्टर के पास जाना डरावना लग सकता है, खासकर जब घर में ये बातें कभी खुलकर नहीं हुईं। पर डॉक्टर से ये सब पूछना बिल्कुल ठीक है। क्या पूछें, ये डॉक्टर से मेनोपॉज़ के बारे में कैसे बात करें में लिखा है।
पीरियड की एक छोटी डायरी कैसे रखें?
आपको कोई ख़ास चार्ट नहीं चाहिए। रसोई के कैलेंडर पर या फ़ोन के नोट्स में बस ये लिखिए:
- पीरियड किस तारीख़ को शुरू हुआ, और कितने दिन चला
- बहाव कैसा था: हल्का, सामान्य या बहुत ज़्यादा
- बीच में कोई धब्बा या ब्लीडिंग
- उस हफ़्ते नींद, मन और गर्मी की लहरें कैसी रहीं
तीन-चार महीने में आपके पास एक ऐसी तस्वीर होगी जो डॉक्टर को बहुत कुछ बता देगी। और आपको भी।
जब अपने ही शरीर पर भरोसा डगमगाने लगे
अनियमित पीरियड्स सिर्फ़ शरीर की बात नहीं हैं। हर महीने अंदाज़ा न लगा पाना थका देता है। कहीं जाने से पहले हिसाब, हल्के रंग के कपड़े पहनने से पहले दो बार सोचना, और मन में ये एहसास कि मेरा अपना शरीर अब मेरी बात नहीं सुनता।
ये सब महसूस करना ठीक है। आपको अपने शरीर से नाराज़ होने की ज़रूरत नहीं, आपको बस उसके साथ थोड़ा धीरज चाहिए। आप बदल नहीं रहीं, आपका शरीर एक नए दौर में जा रहा है। आप वही हैं।
क्या हो अगर इस बदलाव को गलती नहीं, बस ज़िंदगी के एक मोड़ की तरह देखा जाए?
अभी आज़माएं: "मैं वही हूं" वाली 5 मिनट की सांस
- बिस्तर पर या कुर्सी पर आराम से बैठ जाइए, और दोनों हाथ पेट के निचले हिस्से पर रखिए।
- नाक से धीरे सांस लीजिए, और महसूस कीजिए कि हाथ थोड़े ऊपर उठते हैं।
- मुंह से धीरे सांस छोड़िए, ऐसे जैसे कोई लंबी आह निकल रही हो।
- हर सांस छोड़ते हुए मन में कहिए: "मेरा शरीर बदल रहा है। मैं वही हूं।"
- पांच मिनट, या जितना मन करे, यही दोहराइए। फिर हाथ हटाकर एक पल शांत बैठिए।
इसमें कोई सही या गलत नहीं है। अगर बीच में आंखें भर आएं, तो वो भी ठीक है।

ये छोटा सा हिंदी अभ्यास, "तुम अभी भी तुम ही हो", इसी एहसास के लिए बना है।
अगर आज मन में बहुत से सवाल हैं, तो सखी से हिंदी में बात कीजिए। वो डॉक्टर नहीं है और जांच की जगह नहीं ले सकती, पर आपकी बात सुनकर उस पल के लिए कोई अभ्यास या संगीत सुझा सकती है। पूरी तस्वीर के लिए मेनोपॉज़ के लक्षण भी पढ़िए।
5 मिनट। कोई चटाई नहीं। कोई मंत्र नहीं। बस आप।
महिलाएं अक्सर पूछती हैं
40 के बाद पीरियड्स अनियमित होना सामान्य है?+
अक्सर हां। 40 के बाद अनियमित पीरियड्स पेरिमेनोपॉज़ का आम संकेत हैं। चक्र छोटा या लंबा हो सकता है और बहाव बदल सकता है। फिर भी डॉक्टर से एक बार बात कर लेना अच्छा है।
अनियमित पीरियड्स में डॉक्टर को कब दिखाएं?+
बहुत ज़्यादा ब्लीडिंग, दो पीरियड्स के बीच ब्लीडिंग, मेनोपॉज़ के बाद कोई भी ब्लीडिंग, या 40 से पहले पीरियड्स रुक जाएं, तो डॉक्टर को ज़रूर दिखाइए।
मेनोपॉज़ कब माना जाता है?+
जब लगातार 12 महीने तक पीरियड न आए। उससे पहले कुछ महीनों का अंतराल आकर फिर पीरियड आना पेरिमेनोपॉज़ का हिस्सा है।
क्या पेरिमेनोपॉज़ में गर्भ ठहर सकता है?+
जब तक मेनोपॉज़ पूरा न हो, संभावना पूरी तरह ख़त्म नहीं होती। अगर पीरियड देर से है और ये सवाल मायने रखता है, तो जांच कीजिए और डॉक्टर से गर्भनिरोध के बारे में पूछिए।
पेरिमेनोपॉज़ कितने साल चलता है?+
औसतन करीब 4 साल, पर ये कुछ महीनों से लेकर 10 साल तक भी चल सकता है।
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