पेरिमेनोपॉज़ क्या है? 40 की उम्र में शुरुआती संकेत
पिछले महीने पीरियड 20 दिन में ही आ गया। इस महीने 40 दिन हो गए और अभी तक नहीं आया। आप 41 की हैं, और जब आपकी सहेली ने कहा, "शायद मेनोपॉज़ शुरू हो रहा है", तो आपने हंसकर बात टाल दी। अभी तो बहुत जल्दी है, है ना?
फिर रात को, सबके सो जाने के बाद, आपने फ़ोन पर चुपके से खोजा। और वहां ढेर सारे डरावने जवाब मिले, जिनसे मन और उलझ गया। तो चलिए, आज सीधी और आसान बात करते हैं।
संक्षेप में: पेरिमेनोपॉज़ क्या है? ये मेनोपॉज़ से पहले का बदलाव वाला दौर है, जब हॉर्मोन ऊपर-नीचे होने लगते हैं और पीरियड्स अनियमित हो जाते हैं। ये औसतन करीब 4 साल चलता है, पर कुछ महीनों से लेकर 10 साल तक भी चल सकता है। मेनोपॉज़ तब माना जाता है जब लगातार 12 महीने तक पीरियड न आए।
पेरिमेनोपॉज़ क्या है, आसान शब्दों में?
एक पुराने रेडियो के बारे में सोचिए, जिसकी सुई स्टेशन पकड़ते-पकड़ते फिसल जाती है। कभी आवाज़ साफ़, कभी खरखराहट। पेरिमेनोपॉज़ में हॉर्मोन कुछ ऐसे ही चलते हैं। वो एकदम से बंद नहीं होते, बल्कि ऊपर-नीचे होते रहते हैं। इसीलिए एक महीना ठीक निकलता है, और अगला उलझा हुआ।
मेनोपॉज़ असल में एक दिन है: वो दिन जब आपको आख़िरी पीरियड आए पूरे 12 महीने हो जाएं। उससे पहले का दौर पेरिमेनोपॉज़ है, और उसके बाद का समय पोस्टमेनोपॉज़ कहलाता है।
ज़्यादातर औरतें 45 से 55 की उम्र के बीच मेनोपॉज़ तक पहुंचती हैं। भारत में हुई स्टडीज़ अक्सर इसकी औसत उम्र थोड़ी पहले, करीब 46 से 47 साल बताती हैं। तो अगर पेरिमेनोपॉज़ औसतन 4 साल पहले शुरू होता है, तो 40 के आसपास संकेत दिखना बिल्कुल समझ में आता है।
40 की उम्र में पेरिमेनोपॉज़ के शुरुआती संकेत क्या हैं?
हर औरत की कहानी अलग होती है, पर ये संकेत बहुत आम हैं:
- पीरियड्स का जल्दी या देर से आना, या बहाव का बदल जाना
- सोने में दिक्कत, या रात को बार-बार नींद खुलना
- अचानक गर्मी की लहर, खासकर गर्दन और चेहरे पर
- बिना वजह घबराहट, या मन का बेचैन रहना
- छोटी बातों पर चिड़चिड़ापन या आंसू
- बातें भूलना, जैसे दिमाग पर धुंध छाई हो
- पहले से ज़्यादा थकान
आपको ये सब होना ज़रूरी नहीं। किसी को सिर्फ़ नींद की परेशानी होती है, किसी को सिर्फ़ घबराहट। पूरी सूची, समूहों में बंटी हुई, मेनोपॉज़ के लक्षण में है।
क्या ये सिर्फ़ तनाव है, या पेरिमेनोपॉज़?
सच कहें तो दोनों अक्सर साथ चलते हैं। 40 के आसपास ज़िंदगी भी सबसे भारी होती है। बच्चों की पढ़ाई, बूढ़े होते माता-पिता या सास-ससुर, घर, काम। ऐसे में बदलते हॉर्मोन तनाव को और तीखा बना देते हैं।
अमेरिका की एक लंबी स्टडी, जिसे स्वान स्टडी कहते हैं, ने पाया कि पेरिमेनोपॉज़ के दौरान उदासी और डिप्रेशन के लक्षणों का खतरा 2 से 4 गुना तक बढ़ जाता है। अगर आप इन दिनों खुद को पहचान नहीं पा रहीं, तो ये आपकी कमज़ोरी नहीं है। ये एक असली, शारीरिक बदलाव है।
आपको किसी को ये साबित करने की ज़रूरत नहीं कि आप "बहुत ज़्यादा सोच रही हैं" या नहीं। आपको बस इतना मानना है कि कुछ बदल रहा है, और उसका ध्यान रखना ठीक है। घबराहट ज़्यादा हो, तो पेरिमेनोपॉज़ में घबराहट को कैसे संभालें पढ़िए।
डॉक्टर से कब बात करें?
पेरिमेनोपॉज़ के लिए आपको किसी बड़ी जांच का इंतज़ार नहीं करना है। अगर लक्षण आपकी रोज़ की ज़िंदगी पर असर डाल रहे हैं, तो डॉक्टर से बात करना बिल्कुल ठीक है। कुछ बातों में देर न कीजिए:
- 40 से पहले पीरियड्स बंद हो जाएं। इसे प्रीमैच्योर ओवेरियन इनसफ़िशिएंसी कहते हैं, और ये करीब 100 में से 1 औरत को होता है।
- 45 से पहले मेनोपॉज़ के संकेत दिखें, जिसे जल्दी मेनोपॉज़ कहा जाता है
- बहुत ज़्यादा ब्लीडिंग हो, या दो पीरियड्स के बीच ब्लीडिंग हो
- मन हफ़्तों तक भारी रहे
अगर कभी खुद को नुकसान पहुंचाने के ख़याल आएं, तो अभी अपने इलाके की इमरजेंसी सेवा या किसी क्राइसिस हेल्पलाइन से संपर्क कीजिए।
डॉक्टर के पास जाने से पहले अपने पीरियड्स की तारीख़ें और लक्षण लिख लेना बहुत काम आता है। डॉक्टर से मेनोपॉज़ के बारे में कैसे बात करें में साथ ले जाने लायक एक सूची है।
अभी आज़माएं: पैरों को ज़मीन पर लाने वाली 5 मिनट की सांस
जब मन सवालों से भर जाए, तो शरीर को ज़मीन पर लाना मदद कर सकता है। इसके लिए चटाई नहीं चाहिए, बस एक कुर्सी या बिस्तर का किनारा।
- बैठ जाइए और दोनों पैर ज़मीन पर सपाट रखिए। एड़ियों का भार महसूस कीजिए।
- आसपास पांच चीज़ें देखिए और मन में उनके नाम लीजिए: पंखा, परदा, दीवार की घड़ी, जो भी दिखे।
- चार चीज़ें छूकर महसूस कीजिए: दुपट्टे का कपड़ा, कुर्सी का हत्था, अपनी हथेली, घुटना।
- अब नाक से धीरे सांस लीजिए और मुंह से धीरे-धीरे छोड़िए, ऐसे जैसे सामने रखे दीये की लौ बस थोड़ी सी हिले, बुझे नहीं।
- हर सांस छोड़ते हुए मन में कहिए, "मैं यहां हूं।" कुछ मिनट यही दोहराइए।
मन भटके, तो कोई बात नहीं। लौट आना ही अभ्यास है। आप इसे गलत नहीं कर सकतीं।

ये करीब ढाई मिनट का हिंदी गाइडेड अभ्यास, "मैं यहाँ हूँ", ठीक इसी एहसास पर बना है। जब अकेले करना मुश्किल लगे, तो बस प्ले दबाइए।
क्या हो अगर पेरिमेनोपॉज़ कोई अंत नहीं, बस एक बदलाव हो, जिसमें आप अपने शरीर की बात पहले से ज़्यादा ध्यान से सुनना सीखें?
अगर आज आपके मन में बहुत से सवाल हैं, तो सखी से हिंदी में बात कीजिए। आप बताइए कि कैसा महसूस कर रही हैं, और वो उस पल के लिए कोई अभ्यास या संगीत सुझाएगी। वो डॉक्टर नहीं है, पर सुनने वाली ज़रूर है।
5 मिनट। कोई चटाई नहीं। कोई मंत्र नहीं। बस आप।
महिलाएं अक्सर पूछती हैं
पेरिमेनोपॉज़ क्या होता है?+
पेरिमेनोपॉज़ मेनोपॉज़ से पहले का दौर है, जब हॉर्मोन ऊपर-नीचे होते हैं और पीरियड्स अनियमित होने लगते हैं। मेनोपॉज़ तब माना जाता है जब लगातार 12 महीने तक पीरियड न आए।
पेरिमेनोपॉज़ कितने साल तक चलता है?+
औसतन करीब 4 साल। पर ये कुछ महीनों का भी हो सकता है और 10 साल तक भी चल सकता है। हर औरत का अनुभव अलग होता है।
क्या 40 की उम्र में पेरिमेनोपॉज़ शुरू हो सकता है?+
हां। भारत में हुई स्टडीज़ अक्सर मेनोपॉज़ की औसत उम्र करीब 46 से 47 बताती हैं, और पेरिमेनोपॉज़ उससे कुछ साल पहले शुरू होता है। इसलिए 40 के आसपास संकेत दिखना आम है।
पेरिमेनोपॉज़ के पहले लक्षण क्या होते हैं?+
अक्सर पीरियड्स का जल्दी या देर से आना, नींद टूटना, गर्मी की लहरें, घबराहट, चिड़चिड़ापन और भूलना। सबको सारे लक्षण नहीं होते।
पेरिमेनोपॉज़ के लिए डॉक्टर को कब दिखाएं?+
जब लक्षण रोज़ की ज़िंदगी पर असर डालें, 40 से पहले पीरियड्स रुक जाएं, बहुत ज़्यादा या बीच में ब्लीडिंग हो, या मन हफ़्तों तक भारी रहे।
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