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मेनोपॉज़ में बाल झड़ना: शीशे में वो औरत और खुद से दोस्ती

लेखिका: नंदिता, MySakhi की संस्थापक5 मिनट पढ़ने का समय

सुबह कंघी करते हुए आप रुक जाती हैं। कंघी में पहले से ज़्यादा बाल हैं। तकिए पर भी कुछ बाल पड़े थे। बाथरूम के शीशे में मांग थोड़ी चौड़ी दिखती है, और गालों की त्वचा कुछ रूखी, कुछ थकी सी। आप एक पल को सोचती हैं: यह कौन है?

फिर रसोई से आवाज़ आती है, टिफ़िन बाकी है, और आप वह सवाल वहीं शीशे पर छोड़कर निकल जाती हैं। पर वह सवाल दिन भर साथ चलता है।

संक्षेप में: मेनोपॉज़ में बाल झड़ना और बालों का पतला होना कई औरतों के साथ होता है, क्योंकि इस दौर में हार्मोन बदलते हैं। त्वचा भी अक्सर रूखी और ज़्यादा नाज़ुक लगने लगती है। अगर बाल अचानक या गुच्छों में झड़ें, या साथ में थकान जैसी दूसरी बातें हों, तो डॉक्टर से जांच करवाइए। और रोज़ 5 मिनट खुद को नरमी से देखना मन को सहारा दे सकता है।

मेनोपॉज़ में बाल झड़ना: ऐसा क्यों होता है?

पेरिमेनोपॉज़ और मेनोपॉज़ के सालों में शरीर के हार्मोन ऊपर-नीचे होते हैं, और इसका असर बालों पर भी दिख सकता है। बहुत सी औरतें देखती हैं कि बाल पहले जितने घने नहीं रहे, मांग चौड़ी लगती है, या चोटी पतली हो गई है।

इसके साथ नींद की कमी, लगातार तनाव और भागदौड़ भी अपना हिस्सा जोड़ते हैं। और यह भी याद रखिए कि बाल झड़ने की और भी वजहें हो सकती हैं, जैसे थायरॉइड या खून की कमी, जिनकी जांच सिर्फ़ डॉक्टर ही कर सकती हैं। इसलिए हर बार इसे सिर्फ़ उम्र का असर मानकर छोड़ देना ठीक नहीं।

त्वचा में क्या बदलता है?

कई औरतों को लगता है कि त्वचा पहले से ज़्यादा रूखी हो गई है, जल्दी खिंचती है, या उस पर पहले वाली चमक नहीं रही। किसी को खुजली ज़्यादा होती है, किसी को लगता है कि पुरानी क्रीम अब असर नहीं करती।

यह सब आपकी लापरवाही का नतीजा नहीं है। शरीर एक नए दौर में जा रहा है। इस पर दुख होना स्वाभाविक है, और उस दुख को महसूस करना भी ठीक है।

ऐसे और बदलावों के बारे में पढ़ना हो तो मेनोपॉज़ के लक्षण की पूरी सूची देखिए। और अगर बदलाव के साथ हर वक़्त की थकान भी है, तो हर समय थकान पढ़िए।

कब डॉक्टर से मिलें?

डॉक्टर से ज़रूर मिलिए अगर:

  • बाल अचानक, बहुत तेज़ी से या गुच्छों में झड़ने लगें।
  • सिर पर कहीं गोल खाली जगह दिखे।
  • सिर की त्वचा में लालपन, दर्द या लगातार खुजली हो।
  • बालों के साथ बहुत ज़्यादा थकान, वज़न में अचानक बदलाव या धड़कन की परेशानी भी हो।
  • मेनोपॉज़ के बाद कोई भी ब्लीडिंग हो, या पीरियड्स में बहुत ज़्यादा ब्लीडिंग हो।

डॉक्टर के पास जाने से पहले डॉक्टर से मेनोपॉज़ की बात वाली सूची बना लीजिए, ताकि कोई बात छूट न जाए।

शीशे में वो औरत कौन है?

वह वही औरत है जिसने इतने साल सबको संभाला। जिसने रात-रात जागकर बच्चों का बुखार देखा, जिसने त्योहारों पर सबसे आख़िर में खाना खाया, जिसने किसी को खबर न होने दी कि वह कितनी थकी है।

हमारे आसपास अक्सर औरत की कीमत उसके चेहरे और बालों से आंकी गई है। किसी शादी में कोई रिश्तेदार कह देती हैं, "अरे, कितनी बदल गई हो।" और वह बात रात तक चुभती रहती है। पर बदलना कोई कसूर नहीं है। यह उन सालों का निशान है जो आपने जिए, और जो आपने दूसरों के लिए दिए।

आपको अपने चेहरे से लड़ने की ज़रूरत नहीं, आपको बस उससे दोस्ती करने का एक मौका चाहिए। क्या हो अगर कल सुबह आप शीशे में कमियाँ गिनने की जगह उन आंखों को देखें, जिन्होंने इतना कुछ देखा और फिर भी नरम बनी रहीं?

तुलना नहीं। नरमी।

पुरानी तस्वीरों से तुलना नहीं। शादी की एल्बम वाली उस लड़की से मुकाबला नहीं। आज के चेहरे को एक नरम नमस्ते, बस।

बालों में हल्के हाथ से तेल लगाना, जैसे बचपन में माँ लगाती थीं, कई औरतों को बालों से ज़्यादा मन के लिए सुकून देता है। यह कोई इलाज नहीं है। यह बस अपने आप को छूने का एक प्यार भरा बहाना है।

अभी आज़माएं: शीशे के सामने 5 मिनट

  1. बाथरूम या कमरे के शीशे के सामने खड़ी हो जाइए। तेज़ रोशनी हो तो उसे थोड़ा धीमा कर दीजिए।
  2. एक हाथ दिल पर रखिए, दूसरा पेट पर।
  3. नाक से चार गिनती तक धीरे सांस लीजिए और मुंह से छह गिनती तक छोड़िए। ऐसा पांच बार कीजिए।
  4. अब अपने चेहरे में एक चीज़ ढूंढिए जो आपको अच्छी लगती है। आंखें, मुस्कान की लकीरें, कुछ भी।
  5. मन में या धीमे से कहिए: "तुमने बहुत संभाला है। यह शरीर अभी भी मेरा है।"

पहली बार यह अटपटा लग सकता है। ठीक है। आप इसे गलत नहीं कर सकतीं। अगर आंखें भर आएं, तो उन्हें भरने दीजिए।

अगर शरीर के बदलाव से जुड़ा मन भारी हो, तो यह हिंदी अभ्यास भी सुन सकती हैं:

आज रात सोने से पहले, बस एक बार शीशे में खुद को नरमी से देखिए। शरीर से दोस्ती वाला यह हिंदी अभ्यास यहाँ सुनिए, या सखी को बताइए कि आज आप खुद को कैसा महसूस कर रही हैं। अपने लिए समय निकालने की इजाज़त के बारे में अपने लिए 5 मिनट भी पढ़िए।

5 मिनट। कोई चटाई नहीं। कोई मंत्र नहीं। बस आप।

महिलाएं अक्सर पूछती हैं

क्या मेनोपॉज़ में बाल झड़ना आम है?+

हाँ, मेनोपॉज़ के आसपास कई औरतें बाल पतले होने या ज़्यादा झड़ने को महसूस करती हैं, क्योंकि इस दौर में हार्मोन बदलते हैं। फिर भी इसकी दूसरी वजहों की जांच ज़रूरी है।

मेनोपॉज़ में बाल झड़ें तो डॉक्टर से कब मिलें?+

अगर बाल अचानक या गुच्छों में झड़ें, सिर पर खाली जगह दिखे, खुजली या लालपन हो, या साथ में बहुत थकान या वज़न में अचानक बदलाव हो, तो डॉक्टर से मिलिए।

मेनोपॉज़ में त्वचा रूखी क्यों हो जाती है?+

हार्मोन बदलने के साथ कई औरतों की त्वचा ज़्यादा रूखी और नाज़ुक लगने लगती है। अगर खुजली, दाने या कोई बदलाव परेशान करे, तो डॉक्टर से बात कीजिए।

क्या मेनोपॉज़ में झड़े बाल वापस आ सकते हैं?+

यह बाल झड़ने की वजह पर निर्भर करता है। कुछ वजहों का इलाज हो सकता है, इसलिए खुद अंदाज़ा लगाने के बजाय डॉक्टर से जांच करवाना सबसे अच्छा है।

बदलते चेहरे को अपनाना इतना मुश्किल क्यों लगता है?+

क्योंकि हम सालों से एक खास चेहरे को अपना मानते आए हैं। इस बदलाव पर दुख होना ठीक है। रोज़ 5 मिनट खुद को नरमी से देखना धीरे-धीरे दोस्ती बना सकता है।

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