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हर समय थकान: पेरिमेनोपॉज़ में आराम क्यों ज़रूरी है

लेखिका: नंदिता, MySakhi की संस्थापक5 मिनट पढ़ने का समय

अलार्म बजने से पहले ही आँख खुल गई। फिर भी उठते समय शरीर इतना भारी, जैसे रात भर किसी ने उस पर रज़ाइयां रख दी हों। नाश्ता बना, टिफ़िन पैक हुए, और दस बजते-बजते मन कर रहा है कि बस वहीं रसोई के फ़र्श पर बैठ जाऊं।

और साथ में एक आवाज़ भी: "सब तो कर रही हैं, मैं ही इतना क्यों थकती हूँ?"

संक्षेप में: पेरिमेनोपॉज़ में हर समय थकान बहुत आम है। टूटी नींद, रात का पसीना और हार्मोन का उतार-चढ़ाव, सब मिलकर शरीर को थका सकते हैं। पर थकान के दूसरे कारण भी होते हैं, इसलिए डॉक्टर से थायरॉइड, आयरन और विटामिन बी12 की जांच की बात कीजिए। और रोज़ 5 मिनट का सच्चा आराम लीजिए, बिना गिल्ट के।

पेरिमेनोपॉज़ में हर समय थकान क्यों रहती है?

हॉट फ्लैश और रात का पसीना लगभग 4 में से 3 औरतों को होता है। रात को दो बार पसीने में भीगकर जागना, चादर बदलना, फिर नींद लौटने का इंतज़ार। सुबह तक शरीर ने आराम किया ही कब? ऊपर से पेरिमेनोपॉज़ में नींद अक्सर हल्की और टूटी रहती है, भले ही आप बिस्तर पर आठ घंटे बिताएं।

फिर वह थकान भी है जो किसी जांच में नहीं दिखती। घर में सबकी दवा, सबका खाना, सबका मूड याद रखने वाली अक्सर एक ही होती है। मन का यह बोझ भी शरीर ही उठाता है।

और कभी-कभी थकान उदासी का रूप भी होती है। स्वान नाम की एक लंबी स्टडी में पाया गया कि पेरिमेनोपॉज़ में उदासी के लक्षणों का खतरा 2 से 4 गुना तक बढ़ जाता है। अगर थकान के साथ मन भी कई हफ़्तों से बुझा-बुझा है, तो यह डॉक्टर को ज़रूर बताइए। और अगर कभी खुद को नुकसान पहुंचाने के ख़याल आएं, तो अभी अपनी स्थानीय इमरजेंसी सेवा या किसी क्राइसिस हेल्पलाइन से संपर्क कीजिए।

"बस मेनोपॉज़ है" कहकर टालिए मत: कौन सी जांच करवाएं?

हर थकान मेनोपॉज़ की नहीं होती। थायरॉइड की गड़बड़ी, खून में आयरन की कमी, और विटामिन बी12 की कमी भी लगभग ऐसी ही थकान दे सकती हैं, और इनकी जांच आसान है। अपने डॉक्टर से सीधे कहिए: "मुझे हर समय थकान रहती है। क्या थायरॉइड, आयरन और बी12 की जांच हो सकती है?"

अगर थकान के साथ सीने में दर्द हो, सांस फूले, या चक्कर आकर गिरने जैसा लगे, तो इंतज़ार मत कीजिए, तुरंत डॉक्टर से मिलिए।

आराम की इजाज़त: थकान का जवाब और काम नहीं

हम में से बहुत सी औरतों ने बचपन से सीखा है कि दिन में लेटना आलस है। माँ को कभी दोपहर में आराम से लेटे देखा था? शायद ही कभी। पर आपका शरीर अभी एक बड़े बदलाव से गुज़र रहा है, और उसे थोड़ा ज़्यादा आराम चाहिए। यह कमज़ोरी नहीं है।

एक और कप चाय पीकर खुद को आगे धकेलना नहीं। पांच मिनट लेट जाना।

आपको और ताकत की ज़रूरत नहीं है। आपको थोड़े आराम की ज़रूरत है। दिन में 5 मिनट लेटना ठीक है। काम अधूरा छोड़कर बैठ जाना ठीक है। "आज नहीं हो पाएगा" कहना भी ठीक है।

अभी आज़माएं: भारी शरीर वाला 5 मिनट का आराम

  1. बिस्तर पर लेट जाइए, या कुर्सी पर पीठ टिकाकर बैठ जाइए। हो सके तो दरवाज़ा भिड़ा दीजिए।
  2. मुंह से तीन लंबी आहें छोड़िए, जैसे आप कंधे से कोई भारी थैला उतार रही हों।
  3. अब नाक से 4 गिनती में सांस लीजिए और 6 गिनती में छोड़िए। हर छोड़ती सांस के साथ शरीर को गद्दे या कुर्सी में थोड़ा और धंसने दीजिए।
  4. पैरों से शुरू करके ऊपर तक, हर हिस्से पर एक सांस रुकिए: पैर, घुटने, कमर, पेट, कंधे, जबड़ा, आँखें। मन में कहिए, "अब तुम आराम कर सकते हो।"
  5. उठने से पहले हाथ-पैर की उंगलियां हिलाइए, एक करवट लीजिए, और फिर धीरे से उठिए।

पांच मिनट में नींद आ जाए, तो भी ठीक है। मन बीच में रसोई की तरफ़ भागे, तो भी ठीक है। आप इसे गलत नहीं कर सकतीं।

दिन के कौन से पल आराम के लिए चुन सकती हैं?

  • दोपहर का खाना और बर्तन निपटने के बाद। पहले अपने 5 मिनट, फिर बाकी काम।
  • बच्चों के स्कूल से लौटने से पहले का खाली समय।
  • दफ़्तर में खाने के बाद, कुर्सी पर पीठ टिकाकर, आँखें बंद।
  • शाम की चाय के बाद, छत पर या बालकनी में खड़े होकर तीन लंबी सांसें।

रात की नींद थोड़ी बेहतर हो, तो दिन की थकान भी हल्की हो सकती है। इसके लिए ये दो लेख भी पढ़िए: नींद न आने पर क्या करें और रात को पसीना आना: नींद टूटे तो क्या करें। अगर अनिद्रा लंबे समय से है, तो डॉक्टर से सीबीटी-आई के बारे में पूछिए, जो लंबी अनिद्रा का पहला इलाज माना जाता है।

जब थोड़ी ऊर्जा लौटे

थकान वाले दिनों के बीच कुछ दिन ऐसे भी आएंगे जब थोड़ी ताकत लौटेगी। उन दिनों पूरे हफ़्ते का हिसाब एक दिन में बराबर करने की कोशिश मत कीजिए। बस उस ऊर्जा को महसूस कीजिए। सुबह की धूप में 5 मिनट बैठना, या धीरे-धीरे टहलना, काफ़ी है।

क्या हो अगर इस हफ़्ते आप थकान से लड़ने की बजाय उसकी बात सुनें? हो सकता है वह आपसे कुछ कहना चाह रही हो: "थोड़ा धीमे चलो।"

आज जब बर्तन निपटें, तो बस 5 मिनट के लिए लेट जाइए। और सखी को बताइए कि आज थकान कैसी है, वह आपके लिए आराम का कोई छोटा अभ्यास या संगीत सुझा देगी। अगर आराम लेते हुए भी गिल्ट होता है, तो यह पढ़िए: अपने लिए 5 मिनट: इजाज़त है।

5 मिनट। कोई चटाई नहीं। कोई मंत्र नहीं। बस आप।

महिलाएं अक्सर पूछती हैं

पेरिमेनोपॉज़ में हर समय थकान क्यों रहती है?+

टूटी नींद, रात का पसीना, हार्मोन का उतार-चढ़ाव और मन का बोझ, सब मिलकर थकान बढ़ा सकते हैं। पर थकान के दूसरे कारण भी हो सकते हैं, इसलिए डॉक्टर से जांच ज़रूर करवाइए।

हर समय थकान रहे तो कौन सी जांच करवानी चाहिए?+

अपने डॉक्टर से थायरॉइड, आयरन और विटामिन बी12 की जांच के बारे में पूछिए। आपकी उम्र और लक्षणों के हिसाब से डॉक्टर और जांच भी सुझा सकते हैं।

क्या दिन में लेटना आलस है?+

नहीं। पेरिमेनोपॉज़ में शरीर को थोड़ा ज़्यादा आराम चाहिए हो सकता है। दिन में 5 मिनट लेटकर धीमी सांस लेना कमज़ोरी नहीं, अपने शरीर की बात सुनना है।

थकान में कौन सा सांस का अभ्यास करें?+

लेटकर या कुर्सी पर पीठ टिकाकर तीन लंबी आहें छोड़िए, फिर 4 गिनती में सांस लीजिए और 6 में छोड़िए। हर सांस के साथ शरीर के एक हिस्से को ढीला होने दीजिए। 5 मिनट काफ़ी हैं।

थकान के साथ उदासी भी हो तो क्या करें?+

पेरिमेनोपॉज़ में उदासी का खतरा बढ़ सकता है। कई हफ़्तों से मन भारी हो तो डॉक्टर को बताइए। खुद को नुकसान पहुंचाने के ख़याल आएं तो अभी इमरजेंसी सेवा या क्राइसिस हेल्पलाइन से संपर्क कीजिए।

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