मेनोपॉज़ में नींद क्यों नहीं आती — और क्या सच में काम करता है
मेनोपॉज़ के दौरान नींद में बाधा सबसे आम शिकायत है। शोध बताते हैं कि 40-60% महिलाएं मेनोपॉज़ में नींद की समस्या झेलती हैं।
नींद क्यों बाधित होती है?
जब एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन का स्तर गिरता है, तो शरीर का आंतरिक तापमान नियंत्रण बिगड़ जाता है। इसका मतलब: - रात को पसीना और गर्मी की लहरों से बार-बार नींद टूटती है - चिंता और बेचैन विचार बढ़ जाते हैं - शरीर की प्राकृतिक नींद-जागने की लय बदल जाती है
क्या सच में काम करता है
1. नियमित नींद की दिनचर्या हर रात एक ही समय पर सोना और उठना — छुट्टी के दिन भी। यह शरीर की आंतरिक घड़ी को सबसे ज़्यादा मदद करता है।
2. ठंडा सोने का वातावरण कमरे का तापमान 18-20 डिग्री रखें। सूती या बांस की चादरें इस्तेमाल करें। गर्मी की लहरों के लिए ठंडा तकिया आज़माएं।
3. ध्वनि आधारित नींद सहायता शोध बताते हैं कि विशेष ध्वनि आवृत्तियां गहरी नींद को बढ़ावा देती हैं। राग यमन जैसे शाम के राग स्वाभाविक रूप से शांत करने वाले हैं।
4. सोने से पहले ध्यान 10-15 मिनट का निर्देशित बॉडी स्कैन ध्यान कॉर्टिसोल को कम करता है और जल्दी नींद आती है।

5. सोने से 1 घंटा पहले स्क्रीन बंद करें नीली रोशनी मेलाटोनिन उत्पादन को रोकती है। इसके बजाय, सखी से बात करें और वो आपके लिए सही नींद का कॉन्टेंट सुझाएगी।

सखी से मदद लें
अगर आज रात नींद नहीं आ रही, तो सखी से बात करें। वो आपके मूड और लक्षणों के हिसाब से सबसे अच्छी नींद की कहानी या ध्यान सुझाएगी — बिल्कुल मुफ़्त।

