दिल की धड़कन तेज़ होना: पेरिमेनोपॉज़ में घबराहट और हथेली वाली सांस
आप सोफ़े पर बैठी मटर छील रही थीं। न कोई दौड़-भाग, न कोई बुरी ख़बर। फिर भी अचानक दिल ऐसे धड़कने लगा जैसे आप तीन मंज़िल सीढ़ियां चढ़कर आई हों। कभी लगता है एक धड़कन छूट गई, कभी लगता है धक-धक गले तक सुनाई दे रही है।
और फिर आता है डर। "कहीं दिल में कुछ गड़बड़ तो नहीं?" यही डर धड़कन को और तेज़ कर देता है।
संक्षेप में: पेरिमेनोपॉज़ में दिल की धड़कन तेज़ होना बहुत सी औरतें महसूस करती हैं, और हार्मोन के उतार-चढ़ाव से इसका रिश्ता हो सकता है। पर यह बार-बार हो, तो डॉक्टर से जांच ज़रूर करवाइए। सीने में दर्द, बेहोशी, सांस फूलना या न थमने वाली धड़कन में तुरंत इमरजेंसी जाइए। बाकी पलों में मिनट में लगभग 6 धीमी सांसें सहारा दे सकती हैं।
पेरिमेनोपॉज़ में दिल की धड़कन तेज़ क्यों होती है?
पेरिमेनोपॉज़ औसतन करीब 4 साल चलता है, और इस दौरान हार्मोन किसी सीधी लाइन में नहीं घटते। वे ऊपर-नीचे होते रहते हैं। बहुत सी औरतें बताती हैं कि इन सालों में उन्हें धड़कन तेज़ होना, धड़कन का अटकना, या सीने में फड़फड़ाहट जैसा कुछ महसूस होता है। कई बार यह हॉट फ्लैश के साथ आता है, कई बार रात को नींद में, और कई बार बिना किसी वजह के।
घबराहट और धड़कन एक-दूसरे को बढ़ाते हैं। धड़कन तेज़ हुई, मन डरा, और डर से धड़कन और तेज़। इस चक्र को तोड़ने में सांस मदद कर सकती है। पर उससे पहले एक ज़रूरी बात।
पहले यह: कब तुरंत डॉक्टर या इमरजेंसी?
यह हिस्सा छोड़िए मत। अगर तेज़ धड़कन के साथ इनमें से कुछ भी हो, तो सांस के अभ्यास का इंतज़ार मत कीजिए। तुरंत इमरजेंसी मदद लीजिए:
- सीने में दर्द, दबाव या भारीपन
- बेहोशी, या बेहोश होने जैसा लगना
- सांस फूलना, या सांस लेने में तकलीफ़
- धड़कन जो कुछ मिनटों में भी शांत न हो
अगर ऐसी कोई बात नहीं है, फिर भी धड़कन बार-बार तेज़ होती है, तो डॉक्टर से मिलकर जांच करवाइए। यह सोचकर टालिए मत कि "बस मेनोपॉज़ है।" हो सकता है वही हो, पर यह तय करना डॉक्टर का काम है, आपके अंदाज़े का नहीं।
डॉक्टर के पास जाने से पहले एक हफ़्ते तक एक छोटी सी डायरी रखिए। धड़कन कब तेज़ हुई, उस समय आप क्या कर रही थीं, कितनी देर रही, और साथ में गर्मी या पसीना था या नहीं। अपनी दवाओं की सूची भी साथ रखिए। साथ ले जाने वाली पूरी सूची यहां है: डॉक्टर से मेनोपॉज़ के बारे में कैसे बात करें।
घबराहट में दिल की धड़कन तेज़ होना: सांस कैसे मदद करती है?
जब हम डरते हैं, तो सांस छोटी हो जाती है और ऊपर-ऊपर, छाती से चलने लगती है। धीमी, लंबी सांस इसका उल्टा संदेश देती है। मिनट में लगभग 6 सांसें दिल की शांत लय और शरीर के "आराम और पाचन" वाले जवाब से जुड़ी पाई गई हैं।
मतलब, आप धड़कन को ज़बरदस्ती धीमा नहीं कर रहीं। आप बस शरीर को याद दिला रही हैं कि अभी कोई खतरा नहीं है। आपको धड़कन से लड़ने की ज़रूरत नहीं है। आपको बस थोड़ी देर उसके साथ बैठने की ज़रूरत है।
अभी आज़माएं: हथेली वाली सांस (5 मिनट)
- जहां हैं, वहीं बैठ जाइए, या दीवार से पीठ टिका लीजिए। पैर ज़मीन पर, घुटने ढीले।
- दाहिनी हथेली छाती के बीच में रखिए और बाईं हथेली पेट पर। धड़कन को महसूस कीजिए, उसे बदलने की कोशिश किए बिना।
- नाक से 4 गिनती तक धीरे से सांस लीजिए, ऐसे कि पेट वाली हथेली थोड़ी ऊपर उठे।
- होंठ हल्के गोल करके 6 गिनती तक सांस छोड़िए, जैसे आप किसी गरम घूंट को फूंक रही हों।
- हर बार सांस छोड़ते हुए मन में कहिए, "यह पल गुज़र जाएगा।" ऐसा 5 मिनट तक कीजिए।
गिनती गड़बड़ा जाए, तो कोई बात नहीं। आप इसे गलत नहीं कर सकतीं। बस छोड़ने वाली सांस लंबी रखिए। और अगर 5 मिनट बाद भी धड़कन वैसी ही तेज़ है, या ऊपर वाले कोई भी संकेत दिखें, तो रुकिए मत, मदद लीजिए।

रोज़ के किन पलों में यह आज़माएं?
- रात को बिस्तर पर लेटकर, जब धड़कन तकिए में सुनाई देने लगे।
- पूजा या आरती से पहले, जब मन यहां-वहां भाग रहा हो।
- किसी मुश्किल फ़ोन कॉल के बाद, बालकनी में दो मिनट खड़े होकर।
- हॉट फ्लैश के साथ जब धड़कन भी बढ़ जाए। उसके लिए यह भी पढ़िए: अचानक तेज़ गर्मी लगना।
धड़कन गिनते हुए घबराना नहीं। हथेली रखकर सांस को लंबा करना।
जब डर ही सबसे भारी हो
"कहीं कुछ बड़ा तो नहीं?" यह सवाल आना बिल्कुल ठीक है। डर का मतलब यह नहीं कि आप ज़्यादा सोचती हैं। इसका मतलब है कि आप अपने शरीर की परवाह करती हैं। डॉक्टर की जांच इस डर को सबसे अच्छे से शांत करती है, इसलिए उसे टालिए मत।
बहुत सी औरतें धड़कन के साथ बेचैनी, टूटी नींद और बिना वजह का डर भी महसूस करती हैं। इस पर एक और लेख: पेरिमेनोपॉज़ में घबराहट को कैसे संभालें। और सारे लक्षण एक जगह: मेनोपॉज़ के लक्षण: पूरी सूची।
अपने डर के साथ अकेले बैठे रहना ज़रूरी नहीं। किसी अपने को बताइए कि आजकल धड़कन तेज़ होती है। बताने भर से भी आधा बोझ उतर जाता है।
धड़कन से लड़ना नहीं, उसके साथ बैठना। बस इतना।
अगली बार धड़कन तेज़ हो, और डॉक्टर बाकी कारण देख चुके हों, तो जैसी हो, स्थिर हो: हिंदी अभ्यास चला दीजिए, या सखी को बताइए कि अभी कैसा लग रहा है। वह उस पल के लिए कुछ सुझा देगी। क्या हो अगर अगली धक-धक डर की जगह एक लंबी सांस की याद दिलाए?
5 मिनट। कोई चटाई नहीं। कोई मंत्र नहीं। बस आप।
महिलाएं अक्सर पूछती हैं
क्या पेरिमेनोपॉज़ में दिल की धड़कन तेज़ होना सामान्य है?+
बहुत सी औरतें पेरिमेनोपॉज़ में धड़कन तेज़ होना या अटकना महसूस करती हैं, और हार्मोन के उतार-चढ़ाव से इसका रिश्ता हो सकता है। फिर भी इसे खुद सामान्य मान लेने से पहले डॉक्टर से जांच करवाइए।
दिल की धड़कन तेज़ हो तो कब इमरजेंसी जाना चाहिए?+
अगर धड़कन के साथ सीने में दर्द, बेहोशी या सांस फूलना हो, या धड़कन शांत ही न हो, तो तुरंत इमरजेंसी मदद लीजिए। ऐसे में सांस के अभ्यास का इंतज़ार मत कीजिए।
घबराहट में धड़कन शांत करने के लिए कौन सी सांस करें?+
एक हथेली छाती पर रखकर 4 गिनती में सांस लीजिए और 6 गिनती में धीरे छोड़िए। यह मिनट में लगभग 6 सांसें हैं, जो शरीर के आराम वाले जवाब से जुड़ी हैं। 5 मिनट काफ़ी हैं।
रात को लेटते ही धड़कन क्यों सुनाई देती है?+
रात को बाकी आवाज़ें शांत हो जाती हैं, इसलिए कई औरतों को धड़कन ज़्यादा महसूस होती है। अगर यह बार-बार हो या डर लगे, तो डॉक्टर को ज़रूर बताइए।
डॉक्टर के पास धड़कन के बारे में क्या लेकर जाएं?+
एक हफ़्ते की छोटी डायरी: धड़कन कब तेज़ हुई, आप क्या कर रही थीं, कितनी देर रही, और साथ में गर्मी या पसीना था या नहीं। अपनी दवाओं की सूची भी साथ ले जाइए।
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