मेनोपॉज़ में जोड़ों का दर्द और सुबह की अकड़न: बिस्तर में 5 मिनट
अलार्म बजा, और आपने बिस्तर से पैर नीचे रखे। पहला कदम ज़मीन पर पड़ते ही एड़ी में ऐसी चुभन, जैसे रात भर में किसी ने वहां कंकड़ बिछा दिए हों। रसोई में पहुंचकर आप स्टील के डिब्बे का ढक्कन खोलने लगती हैं, पर उंगलियां साथ नहीं देतीं। मुट्ठी पूरी बंद ही नहीं होती। और फिर छत पर कपड़े सुखाने के लिए सीढ़ियां, जहां हर सीढ़ी पर घुटना कुछ कहता है।
आप सोचती हैं, शायद उम्र है। शायद मैंने ही ध्यान नहीं रखा। पर क्या हो अगर ये आपके शरीर के बदलते दौर की एक और भाषा हो?
संक्षेप में: मेनोपॉज़ में जोड़ों का दर्द और सुबह की अकड़न बहुत सी औरतें महसूस करती हैं, खासकर उंगलियों, घुटनों, कंधों और एड़ियों में। ये अक्सर पेरिमेनोपॉज़ के बाकी बदलावों के साथ आता है। उठने से पहले बिस्तर में ही 5 मिनट की धीमी सांस और हल्का बॉडी स्कैन शरीर को धीरे से जगाने में मदद कर सकता है। सूजन या लाली हो, तो डॉक्टर को दिखाएं।
मेनोपॉज़ में जोड़ों का दर्द क्यों होता है?
पेरिमेनोपॉज़ और मेनोपॉज़ में हॉर्मोन का बदलना सिर्फ़ पीरियड्स या गर्मी की लहरों तक सीमित नहीं रहता। कई औरतें इसी दौर में जोड़ों में दर्द, अकड़न और भारीपन महसूस करती हैं, जो अक्सर सुबह सबसे ज़्यादा होता है और दिन चढ़ने के साथ थोड़ा कम हो जाता है।
इसमें नींद की कमी भी जुड़ जाती है। जब रात टूटी-टूटी गुज़रे, तो सुबह शरीर का हर दर्द थोड़ा ज़्यादा चुभता है। और फिर वो साल, जिनमें आपने हर किसी की सेहत का ध्यान रखा, बस अपनी पीठ, घुटनों और हाथों का नहीं।
जोड़ों का दर्द कहां-कहां महसूस होता है?
- उंगलियां: मुट्ठी बंद करने, आटा गूंधने या ढक्कन खोलने में दिक्कत
- घुटने: सीढ़ियां चढ़ने-उतरने, या ज़मीन पर बैठकर उठने में
- एड़ियां और तलवे: सुबह के पहले कुछ कदम
- कंधे: ऊपर की अलमारी से कुछ उतारते हुए
- कमर और गर्दन: देर तक बैठने या खड़े रहने के बाद
आपके दर्द की जगह अलग हो सकती है। जो भी है, वो असली है, और उसके बारे में बात करना ठीक है।
जोड़ों के दर्द में डॉक्टर को कब दिखाना चाहिए?
जोड़ों का दर्द सिर्फ़ "उम्र का असर" कहकर सहते रहने की चीज़ नहीं है। डॉक्टर से बात कीजिए, अगर:
- किसी जोड़ में सूजन, लाली या गर्माहट हो
- दर्द अचानक बहुत तेज़ हो जाए, या कोई जोड़ हिलाना मुश्किल हो
- चोट के बाद दर्द हो, या आप उस पैर पर वज़न न डाल पाएं
- दर्द के साथ बुखार हो
- अकड़न हफ़्तों तक बनी रहे और रोज़ के काम मुश्किल होने लगें
सूजन या लाली हो, तो देर न कीजिए। ये किसी और वजह का संकेत हो सकता है, जिसकी जांच ज़रूरी है। डॉक्टर से बात की तैयारी के लिए डॉक्टर से मेनोपॉज़ के बारे में कैसे बात करें काम आएगा।
बिस्तर में ही क्यों?
सुबह का पहला काम अक्सर एक दौड़ होता है: बिस्तर से सीधे रसोई, चाय, टिफ़िन, दूधवाला। ठंडे, अकड़े शरीर को एकदम खड़ा कर देना कुछ ऐसा है, जैसे बिना गर्म किए स्कूटर को सीधा तेज़ भगाया जाए।
आपको सुबह की लंबी योग कक्षा की ज़रूरत नहीं, आपको बस उठने से पहले के 5 मिनट चाहिए, उसी रज़ाई के अंदर। ये कसरत नहीं है। ये शरीर से सुबह की नमस्ते है।
अभी आज़माएं: बिस्तर में 5 मिनट का बॉडी स्कैन
- अलार्म बंद करके पीठ के बल लेटी रहिए। तीन धीमी सांसें लीजिए, जिनमें छोड़ना लेने से थोड़ा लंबा हो।
- पैरों से शुरू कीजिए: पंजों को धीरे-धीरे सिकोड़िए और खोलिए, फिर टखनों को दोनों तरफ़ धीरे से घुमाइए।
- ध्यान घुटनों पर ले जाइए। एक-एक घुटना धीरे से थोड़ा मोड़िए और सीधा कीजिए, बिना किसी ज़ोर के।
- अब हाथ: मुट्ठी धीरे से बंद कीजिए और खोलिए, जैसे कोई कली धीरे-धीरे खिल रही हो। फिर कलाइयों को धीरे से घुमाइए।
- कंधे कानों की तरफ़ उठाइए और सांस छोड़ते हुए नीचे गिरा दीजिए। फिर करवट लेकर, हाथ का सहारा लेकर, धीरे से उठ बैठिए।
हर हिस्से पर रुककर बस महसूस कीजिए: कहां अकड़न है, कहां आराम। जहां दर्द हो, वहां ज़ोर न लगाइए। सिर्फ़ उतना हिलाइए, जितना आराम से हो।
5 मिनट काफ़ी हैं। अगर सिर्फ़ पंजों और मुट्ठी तक ही पहुंच पाईं, तो भी ये गिनती में आता है। इसे गलत करने का कोई तरीका नहीं है।
जब रात को या दोपहर में थोड़ा लंबा वक्त मिले, तो "तुम्हारा शरीर धीरे बोलता है" वाला ये 8 मिनट का हिंदी अभ्यास पूरे शरीर के साथ यही करता है, धीरे-धीरे, एक-एक हिस्से पर।
दिन भर के लिए छोटी बातें
- आटा गूंधने से पहले हाथों को एक मिनट गुनगुने पानी में रखिए, और देखिए कि आपको कैसा लगता है
- ज़मीन पर बैठकर काम करने के बजाय कभी-कभी कुर्सी या ऊंचे पीढ़े का सहारा लीजिए
- देर तक एक जगह बैठी हों, तो बीच-बीच में उठकर थोड़ा चल लीजिए
- भारी बाल्टी या थैले अकेले उठाने के बजाय किसी से मदद मांगिए
मदद मांगना ठीक है। आपका शरीर सालों से सब कुछ उठा रहा है। अब उसे थोड़ा हल्का करने की इजाज़त है।
अगर दर्द के साथ थकान भी लगातार बनी रहती है, तो हर समय थकान पढ़िए। बाकी लक्षणों के लिए मेनोपॉज़ के लक्षण देखिए।
कल सुबह, अलार्म बंद करने के बाद, सीधे उठने के बजाय बस पंजे हिलाइए। और अगर आज शरीर ज़्यादा भारी लग रहा है, तो सखी को बताइए कि कहां दर्द है। वो उस पल के लिए कोई हल्का अभ्यास या शांत संगीत सुझाएगी।
5 मिनट। कोई चटाई नहीं। कोई मंत्र नहीं। बस आप।
महिलाएं अक्सर पूछती हैं
क्या मेनोपॉज़ में जोड़ों में दर्द होना सामान्य है?+
हां, कई औरतें पेरिमेनोपॉज़ और मेनोपॉज़ में जोड़ों में दर्द और सुबह की अकड़न महसूस करती हैं। फिर भी, किसी और वजह को जांचने के लिए डॉक्टर से एक बार बात करना अच्छा है।
सुबह जोड़ों की अकड़न में क्या करें?+
उठने से पहले बिस्तर में ही 5 मिनट धीमी सांस लीजिए, और पंजे, टखने, घुटने, हाथ और कंधे धीरे-धीरे हिलाइए। ज़ोर न लगाइए, सिर्फ़ उतना जितना आराम से हो।
क्या मेनोपॉज़ में हाथों की उंगलियों में दर्द होता है?+
कई औरतें इस दौर में उंगलियों में अकड़न और दर्द महसूस करती हैं, जैसे मुट्ठी बंद करने या ढक्कन खोलने में दिक्कत। उंगलियों में सूजन या लाली हो, तो डॉक्टर को दिखाइए।
जोड़ों के दर्द में डॉक्टर को कब दिखाएं?+
अगर जोड़ में सूजन, लाली या गर्माहट हो, दर्द अचानक बहुत तेज़ हो, बुखार हो, या आप जोड़ हिला न पाएं, तो देर न कीजिए। हफ़्तों तक बनी अकड़न के लिए भी डॉक्टर से मिलिए।
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