मेनोपॉज़ में गुस्सा और चिड़चिड़ापन: फटने से पहले के 90 सेकंड
रात के खाने का वक्त है। आपने सुबह से तीन बार कहा था कि गीला तौलिया बिस्तर पर मत छोड़ना। और अब, फिर से, वो वहीं पड़ा है। बेटा फ़ोन में है, पति टीवी में, और किसी ने ये तक नहीं पूछा कि आपने खाया या नहीं। अंदर कुछ उबलने लगता है, जैसे दूध उबाल पर आए और गैस बंद करने से पहले ही बर्तन से बाहर गिर जाए। आवाज़ ऊंची हो जाती है। किसी एक पर नहीं, सब पर।
और फिर, दस मिनट बाद, बाथरूम में अकेले खड़े होकर वही पुराना सवाल: मुझे हो क्या गया है? मैं तो ऐसी नहीं थी।
संक्षेप में: मेनोपॉज़ में गुस्सा और चिड़चिड़ापन बहुत आम है। पेरिमेनोपॉज़ में हॉर्मोन ऊपर-नीचे होते हैं, नींद टूटती है, और सहने की ताकत कम लगने लगती है। ये आपकी कमज़ोरी या बुरा स्वभाव नहीं है। गुस्से की लहर आने पर पहले 90 सेकंड में कमरे से हटना और लंबी सांस छोड़ना आपको फटने से पहले संभाल सकता है।
मेनोपॉज़ में गुस्सा इतना ज़्यादा क्यों आता है?
पेरिमेनोपॉज़ में हॉर्मोन का उतार-चढ़ाव मन पर भी असर डालता है। ऊपर से रात का पसीना और टूटी हुई नींद। थका हुआ शरीर छोटी सी बात को भी बड़ा ख़तरा समझने लगता है। और फिर वो सालों का जमा हुआ बोझ, जो आपने हमेशा चुपचाप उठाया।
अमेरिका की लंबी स्वान स्टडी ने पाया कि पेरिमेनोपॉज़ में उदासी और डिप्रेशन के लक्षणों का खतरा 2 से 4 गुना तक बढ़ जाता है। कई औरतों के लिए चिड़चिड़ापन उसी भारी मन के साथ-साथ चलता है।
तो पहली बात साफ़ कर लें: आप बुरी मां, बुरी बहू या बुरी पत्नी नहीं हैं। आपका गुस्सा एक संकेत है, कोई अपराध नहीं।
गुस्सा आना ठीक है, उसके बाद की शर्म ज़रूरी नहीं
हमें बचपन से सिखाया गया कि अच्छी औरत गुस्सा नहीं करती। वो सहती है, मुस्कुराती है, निभाती है। इसलिए जब गुस्सा आता है, तो उसके पीछे-पीछे शर्म भी चली आती है।
गुस्सा महसूस करना ठीक है। आपको अपने गुस्से से शर्मिंदा होने की ज़रूरत नहीं, आपको बस उसके और अपने शब्दों के बीच थोड़ी सी जगह चाहिए। वो जगह है 90 सेकंड।
ये नहीं: गुस्सा दबाना, मुस्कुराना, और फिर रात को अकेले रोना। ये: गुस्से को पहचानना, एक पल के लिए हटना, और फिर अपनी बात कहना।
गुस्से की लहर के संकेत क्या हैं?
गुस्सा आवाज़ से पहले शरीर में आता है। ध्यान दीजिए कि आपके साथ क्या होता है:
- जबड़ा कस जाता है, दांत भिंच जाते हैं
- छाती या चेहरे में गर्मी चढ़ती है
- हाथ तेज़ी से चलने लगते हैं, बर्तन ज़ोर से रखे जाते हैं
- सांस छोटी और ऊपर-ऊपर चलने लगती है
- मन में एक ही वाक्य घूमता है: "हमेशा मैं ही क्यों?"
इनमें से जो भी आपका संकेत है, वही आपकी घंटी है। उसे सुनते ही नीचे वाला तरीका शुरू कर दीजिए।
अभी आज़माएं: फटने से पहले के 90 सेकंड
- संकेत पहचानिए: जबड़ा, गर्मी, तेज़ हाथ। मन में बस इतना कहिए, "लहर आ रही है।"
- एक वाक्य कहकर हटिए, "मैं दो मिनट में आती हूं।" बाथरूम, बालकनी या छत, जहां भी अकेले खड़ी हो सकें।
- हथेलियां ठंडे पानी के नीचे रखिए, या ठंडी दीवार पर टिका दीजिए।
- नाक से 4 गिनती में सांस लीजिए, और मुंह से 8 गिनती में धीरे-धीरे छोड़िए। ऐसी 5 से 6 सांसें।
- लौटने से पहले खुद से पूछिए, "मुझे असल में क्या चाहिए?" फिर वही एक बात शांत आवाज़ में कहिए।
पूरा अभ्यास 5 मिनट से कम का है, और सबसे ज़रूरी हैं पहले 90 सेकंड। इसे सही करने की कोई शर्त नहीं। आधा भी कर लिया, तो भी वो गिनती में आता है।
लौटकर कहने वाली बात कुछ ऐसी हो सकती है: "मैं आजकल बहुत थकी हुई हूं, और मुझे घर के कामों में मदद चाहिए।" गुस्सा अक्सर किसी अनसुनी ज़रूरत की आवाज़ होता है।

जब गुस्सा बहुत भारी हो, तो "आग को बोलने दो" वाला ये 5 मिनट का हिंदी अभ्यास उसे बाहर आने की एक सुरक्षित जगह देता है।
गुस्से के बाद अपराधबोध आए तो क्या करें?
अगर आवाज़ ऊंची हो ही गई, तो खुद को सज़ा देने की ज़रूरत नहीं। बाद में एक छोटा सा वाक्य काफ़ी है: "मैंने ऊंची आवाज़ में बात की, वो ठीक नहीं था। पर मैं सच में बहुत थकी हुई हूं।" माफ़ी और अपनी ज़रूरत, दोनों एक साथ।
क्या हो अगर घर वाले आपके गुस्से को नहीं, आपकी थकान को देखना सीख जाएं? इसके लिए पति को मेनोपॉज़ कैसे समझाएं पढ़ सकती हैं। और मन के उतार-चढ़ाव के बारे में और जानना हो, तो मेनोपॉज़ में मूड स्विंग्स देखिए।

जब सब कुछ बहुत तेज़ लगे, आवाज़ें, रोशनी, लोग, तो ये 3 मिनट का हिंदी अभ्यास, "जब सब कुछ बहुत तेज़ हो", मदद कर सकता है।
मेनोपॉज़ के गुस्से के लिए डॉक्टर से कब बात करें?
अगर गुस्सा या चिड़चिड़ापन हफ़्तों से बना हुआ है, रिश्तों या काम पर असर डाल रहा है, या साथ में उदासी, नींद न आना और ख़ालीपन है, तो डॉक्टर से बात कीजिए। ब्रिटेन की मेनोपॉज़ गाइडलाइन में सीबीटी, यानी सोच और व्यवहार पर काम करने वाली बातचीत की थेरेपी, मेनोपॉज़ से जुड़े उदास मन के लिए एक विकल्प है। बाकी लक्षणों के लिए मेनोपॉज़ के लक्षण देखिए।
अगर कभी खुद को नुकसान पहुंचाने के ख़याल आएं, तो अभी अपने इलाके की इमरजेंसी सेवा या किसी क्राइसिस हेल्पलाइन से संपर्क कीजिए। ये मदद मांगने का बिल्कुल सही वक्त है।
अगली बार जब तौलिया फिर बिस्तर पर मिले, तो याद रखिए: 90 सेकंड आपके हैं। और अगर आज गुस्सा अभी भी अंदर घूम रहा है, तो सखी को बताइए। वो बिना कोई राय बनाए सुनेगी, और उस पल के लिए कोई अभ्यास सुझाएगी।
5 मिनट। कोई चटाई नहीं। कोई मंत्र नहीं। बस आप।
महिलाएं अक्सर पूछती हैं
क्या मेनोपॉज़ में गुस्सा आना सामान्य है?+
हां, पेरिमेनोपॉज़ और मेनोपॉज़ में चिड़चिड़ापन और गुस्सा बहुत आम हैं। हॉर्मोन का उतार-चढ़ाव, टूटी नींद और थकान मिलकर सहने की ताकत कम कर सकते हैं। ये आपकी कमज़ोरी नहीं है।
गुस्सा आने पर तुरंत क्या करें?+
एक पल के लिए कमरे से हट जाइए, हथेलियां ठंडे पानी के नीचे रखिए, और नाक से 4 गिनती में सांस लेकर मुंह से 8 गिनती में छोड़िए। 5 से 6 सांसों के बाद ही जवाब दीजिए।
गुस्से के बाद अपराधबोध से कैसे निपटें?+
खुद को सज़ा देने के बजाय एक छोटा सा वाक्य कहिए, जिसमें माफ़ी भी हो और आपकी ज़रूरत भी। गुस्सा अक्सर किसी अनसुनी ज़रूरत की आवाज़ होता है।
मेनोपॉज़ के गुस्से के लिए डॉक्टर को कब दिखाएं?+
जब गुस्सा या उदासी हफ़्तों तक बने रहें, या रिश्तों और काम पर असर डालें। डॉक्टर इलाज के विकल्प बता सकते हैं, जिनमें सीबीटी भी है। खुद को नुकसान पहुंचाने के ख़याल आएं तो तुरंत इमरजेंसी मदद लें।
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