सांस लेने के व्यायाम: 5 मिनट, कोई चटाई नहीं, कोई मंत्र नहीं
आपने कभी न कभी ज़रूर सोचा होगा: ध्यान-व्यान मेरे बस का नहीं। उसके लिए सुबह 5 बजे उठना पड़ता है, शांत कमरा चाहिए, चटाई, अगरबत्ती, और घंटे भर की फ़ुर्सत। पर आपके घर में तो सुबह 5 बजे सास की चाय चढ़ती है, बच्चों के टिफ़िन बनते हैं, और घंटे भर की फ़ुर्सत साल में एक बार भी नहीं मिलती।
अगर आपने ऐसा सोचा है, तो आप बिल्कुल सही हैं। उस तरीके से नहीं हो पाएगा। और उसकी ज़रूरत भी नहीं है।
संक्षेप में: सांस लेने के व्यायाम के लिए न चटाई चाहिए, न मंत्र, न ख़ाली घंटा। 2023 की स्टैनफ़ोर्ड स्टडी में रोज़ सिर्फ़ 5 मिनट की "लंबी आह वाली सांस", यानी नाक से दो बार सांस अंदर लेना और मुंह से एक लंबी सांस छोड़ना, एक महीने तक करने से मूड बेहतर हुआ और सांस की रफ़्तार धीमी हुई।
मेनोपॉज़ में सांस लेने के व्यायाम क्यों मदद कर सकते हैं?
पेरिमेनोपॉज़ और मेनोपॉज़ में मन अक्सर बिना बताए दौड़ने लगता है। धड़कन तेज़, सांस छोटी, कंधे कानों तक। शरीर हर छोटी बात को ख़तरा मान लेता है।
धीमी सांस, करीब 6 सांसें प्रति मिनट, दिल की शांत लय और शरीर के आराम वाले मोड से जुड़ी है। वो मोड जिसमें शरीर भागने-लड़ने की तैयारी छोड़कर थोड़ा ठहरता है।
2023 में स्टैनफ़ोर्ड के शोधकर्ताओं ने देखा कि जो लोग एक महीने तक रोज़ 5 मिनट लंबी आह वाली सांस का अभ्यास करते रहे, उनका मूड बेहतर हुआ और सांस की रफ़्तार धीमी हुई। वैज्ञानिक इसे साइक्लिक साइइंग कहते हैं। उस स्टडी में ये माइंडफ़ुलनेस ध्यान से भी ज़्यादा मददगार रही।
यानी आपको घंटा नहीं चाहिए। 5 मिनट चाहिए।
सोचिए, आप गाड़ी में बैठी हैं, घर के ठीक बाहर। अंदर जाते ही सवाल, शिकायतें, रात का खाना। इंजन बंद है, और आपके पास 5 मिनट हैं। यही वो जगह है। न कोई तैयारी, न ख़ास कपड़े, न कोई देखने वाला। बस आप और आपकी सांस।
आपको क्या नहीं चाहिए, और क्या चाहिए?
- आपको चटाई की ज़रूरत नहीं, आपको बस एक जगह चाहिए जहां आप 5 मिनट बैठ या खड़ी हो सकें।
- आपको मंत्र की ज़रूरत नहीं। आपकी सांस ही काफ़ी है।
- आपको चुप्पी की ज़रूरत नहीं। प्रेशर कुकर की सीटी के बीच भी सांस चलती है।
- आपको सही तरीके की चिंता करने की ज़रूरत नहीं। इसे गलत करने का कोई तरीका नहीं है।
ये नहीं: एक दिन घंटा भर बैठना, और फिर हफ़्तों छोड़ देना। ये: रोज़ 5 मिनट, जहां हैं वहीं।
अभी आज़माएं: 5 मिनट की लंबी आह वाली सांस
- जहां हैं वहीं रुक जाइए: रसोई में, गाड़ी में, बिस्तर पर या दफ़्तर की कुर्सी पर। कंधे ढीले छोड़िए।
- नाक से एक गहरी सांस लीजिए। फेफड़े भर जाएं, तो नाक से ही एक छोटी सी सांस और खींचिए।
- अब मुंह से एक लंबी, धीमी सांस छोड़िए, जैसे कोई लंबी आह निकल रही हो। पूरी हवा बाहर जाने दीजिए।
- यही दोहराइए: दो बार अंदर नाक से, एक लंबी बार बाहर मुंह से। अपनी रफ़्तार से, बिना जल्दी।
- 5 मिनट बाद रुकिए, और बस एक पल महसूस कीजिए कि शरीर में क्या बदला।
चाहें तो फ़ोन पर 5 मिनट का टाइमर लगा लीजिए, ताकि घड़ी देखने की चिंता न रहे। और अगर सांस लेते हुए चक्कर-सा लगे, तो रुक जाइए और अपनी सामान्य सांस पर लौट आइए। ज़ोर लगाने की कोई ज़रूरत नहीं।

अगर किसी की आवाज़ के साथ करना आसान लगे, तो "एक साँस, अभी इसी पल" वाला ये करीब ढाई मिनट का हिंदी अभ्यास सुनिए।
सांस का अभ्यास कहां और कब करें?
आपकी ज़िंदगी में पहले से ऐसे पल हैं, जिनमें 5 मिनट छुपे हुए हैं:
- सुबह चाय उबलते समय, गैस के सामने खड़े-खड़े
- पूजा से पहले, दीया जलाने के बाद एक पल
- गाड़ी में, घर के बाहर, अंदर जाने से पहले
- दफ़्तर में किसी मुश्किल मीटिंग से पहले
- बच्चों के स्कूल के गेट पर इंतज़ार करते हुए
- रात को बिस्तर पर, बत्ती बुझाने के बाद
इनमें से कोई एक चुन लीजिए। बस एक। और कल से वहीं 5 मिनट।
क्या हो अगर 5 मिनट भी न मिलें?
तो एक मिनट लीजिए। तीन सांसें लीजिए। एक लंबी आह भी गिनती में आती है। अपने लिए रुकना ठीक है, चाहे वो पल कितना भी छोटा हो।
कुछ दिन छूट जाएं, तो भी कोई बात नहीं। ये कोई इम्तिहान नहीं है जिसमें नंबर कटें। जिस दिन याद आए, उसी दिन से फिर शुरू।
ये अभ्यास इलाज नहीं है। अगर घबराहट, उदासी या नींद की परेशानी लंबे समय से है, तो डॉक्टर से भी बात कीजिए। सांस उस बातचीत के साथ चल सकती है, उसकी जगह नहीं ले सकती।
सांस के और तरीकों के लिए मेनोपॉज़ में ध्यान कैसे शुरू करें और रजोनिवृत्ति में सांस के अभ्यास पढ़िए। और अगर अपने लिए वक्त निकालने में ही अपराधबोध होता है, तो अपने लिए 5 मिनट: इजाज़त है आपके लिए है।
कल सुबह जब चाय उबलने लगे, तो बस दो सांसें अंदर, एक लंबी बाहर। और अगर जानना चाहती हैं कि आज आपके लिए कौन सा अभ्यास ठीक रहेगा, तो सखी से पूछिए। हिंदी गाइडेड अभ्यास हिंदी लाइब्रेरी में मुफ़्त हैं।
5 मिनट। कोई चटाई नहीं। कोई मंत्र नहीं। बस आप।
महिलाएं अक्सर पूछती हैं
सांस लेने के व्यायाम कितनी देर करने चाहिए?+
5 मिनट काफ़ी हैं। 2023 की स्टैनफ़ोर्ड स्टडी में रोज़ 5 मिनट की लंबी आह वाली सांस एक महीने तक करने से मूड बेहतर हुआ और सांस की रफ़्तार धीमी हुई।
क्या सांस का अभ्यास बिना चटाई के कर सकते हैं?+
हां, बिल्कुल। ये अभ्यास कुर्सी, बिस्तर, गाड़ी या रसोई में खड़े-खड़े भी हो सकता है। न चटाई चाहिए, न मंत्र, न कोई ख़ास कपड़े।
लंबी आह वाली सांस क्या है?+
इसमें नाक से दो बार सांस अंदर ली जाती है, पहले गहरी और फिर एक छोटी, और मुंह से एक लंबी सांस बाहर छोड़ी जाती है, जैसे लंबी आह। वैज्ञानिक इसे साइक्लिक साइइंग कहते हैं।
क्या मेनोपॉज़ में सांस के व्यायाम से मदद मिलती है?+
धीमी सांस शरीर के आराम वाले मोड से जुड़ी है, और घबराहट के पलों में मन को थोड़ा ठहरने में मदद कर सकती है। ये इलाज नहीं है, इसलिए लंबे समय की परेशानी के लिए डॉक्टर से भी बात कीजिए।
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