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बेटी से मेनोपॉज़ की बात कैसे करें: आसान वाक्य जो आप बोल सकती हैं

लेखिका: नंदिता, MySakhi की संस्थापक5 मिनट पढ़ने का समय

रात के खाने पर आपने गीले तौलिए की बात पर ज़रूरत से ज़्यादा ऊंची आवाज़ में कुछ कह दिया। बाद में जब आप बर्तन समेट रही थीं, बेटी धीरे से रसोई में आई और पूछा, "मम्मी, आप ठीक हो? आजकल आप बहुत जल्दी परेशान हो जाती हो।" आपके मुंह से निकला, "कुछ नहीं, थकी हूँ।"

पर अंदर कहीं आप जानती हैं कि यह सिर्फ़ थकान नहीं है। और यह भी जानती हैं कि आपकी बेटी को एक दिन यही सब खुद समझना पड़ेगा।

संक्षेप में: बेटी को मेनोपॉज़ के बारे में बताना मुश्किल लगता है, पर इसके लिए किसी लंबे भाषण की ज़रूरत नहीं। दो-तीन सीधे वाक्य काफ़ी हैं: आपके शरीर में क्या बदल रहा है, इससे आपका मूड या नींद कैसे बदल सकते हैं, और आपको उससे क्या मदद चाहिए। बेटी 12 की हो या 30 की, सच उसकी उम्र के हिसाब से छोटा या बड़ा किया जा सकता है।

बेटी को मेनोपॉज़ के बारे में बताना ज़रूरी क्यों है?

बच्चे बदलाव भांप लेते हैं। आप भले कुछ न कहें, उन्हें दिखता है कि मम्मी रात को उठती हैं, अचानक पंखा तेज़ करती हैं, या छोटी बात पर भर आती हैं। अगर उन्हें वजह नहीं पता, तो वे अक्सर अपनी ही कहानी गढ़ लेते हैं: "मम्मी मुझसे नाराज़ हैं।" "मैंने कुछ गलत किया।"

दूसरी वजह यह है कि यह कुछ हफ़्तों की बात नहीं है। पेरिमेनोपॉज़ औसतन करीब 4 साल चलता है, किसी के लिए कुछ महीने और किसी के लिए 10 साल तक। इतने लंबे समय तक "कुछ नहीं, थकी हूँ" कहते रहना आपके लिए भी भारी है।

और तीसरी वजह सबसे सुंदर है। आपको शायद यह शब्द किसी ने नहीं दिया था। आपकी बेटी को आप दे सकती हैं। इस चुप्पी पर और यहां पढ़िए: माँ ने कभी मेनोपॉज़ की बात नहीं की।

अभी आज़माएं: बात से पहले पांच सांसों की उल्टी गिनती

बातचीत से पहले दिल थोड़ा घबराए, यह ठीक है। एक मिनट अपने लिए निकालिए।

  1. बात से ठीक पहले किसी शांत कोने में या बालकनी में खड़ी हो जाइए।
  2. सांस लीजिए, और धीरे से छोड़ते हुए मन में कहिए "पांच"।
  3. अगली सांस छोड़ते हुए "चार", फिर "तीन", "दो", "एक"। हर बार छोड़ने वाली सांस थोड़ी लंबी।
  4. "एक" पर कंधे ढीले छोड़िए और अपना पहला वाक्य एक बार मन में दोहराइए।
  5. अब जाइए। पहला वाक्य बोलिए, बाकी बात अपना रास्ता खुद ढूंढ लेगी।

इसमें एक मिनट से भी कम लगता है। आप इसे गलत नहीं कर सकतीं।

वाक्य जो आप सच में बोल सकती हैं

आपको डॉक्टर की तरह समझाने की ज़रूरत नहीं है। आपको बस माँ की तरह सच बोलने की ज़रूरत है। इनमें से जो वाक्य आपको अपना लगे, वही चुन लीजिए:

  • "मेरे शरीर में कुछ बदलाव हो रहे हैं। इसे पेरिमेनोपॉज़ कहते हैं, यह मेनोपॉज़ से पहले का समय है।"
  • "इसमें कभी अचानक गर्मी लगती है, कभी नींद टूटती है, और कभी मैं जल्दी चिढ़ जाती हूँ।"
  • "अगर मैं कभी बिना वजह परेशान लगूं, तो यह तुम्हारी गलती नहीं है।"
  • "मुझे बस इतना चाहिए कि कभी-कभी तुम पूछ लो, 'मम्मी, चाय बना दूं?'"
  • "मैं इस बारे में डॉक्टर से भी बात कर रही हूँ, तो तुम चिंता मत करना।"
  • "तुम्हें कभी कुछ भी पूछना हो, तो पूछ सकती हो। यह शर्म की बात नहीं है।"

छोटी बेटी हो या बड़ी: बात कैसे बदलें?

अगर बेटी 10 से 15 साल की है

हो सकता है घर में एक की शुरुआत हो रही हो और एक का बदलाव। उसके पीरियड शुरू हो रहे हैं, और आपके धीरे-धीरे रुकने की तरफ़ हैं। यह एक प्यारा मौका है। आप कह सकती हैं, "जैसे तुम्हारे पीरियड अभी शुरू हुए हैं, वैसे ही मेरे कुछ सालों में रुक जाएंगे। दोनों शरीर के स्वाभाविक पड़ाव हैं।" ज़्यादा जानकारी की ज़रूरत नहीं। बस इतना कि वह डरे नहीं, और जाने कि वह आपसे पूछ सकती है।

अगर बेटी 20 से 30 साल की है

वह इस सफ़र में आपकी सहेली बन सकती है। उसे थोड़ी ज़्यादा बात बताइए: लक्षण क्या होते हैं, आप डॉक्टर से क्या पूछने वाली हैं, आपको किस बात से राहत मिलती है। हो सकता है वह खुद पढ़ना चाहे। उसे यह लेख भेज दीजिए: पेरिमेनोपॉज़ क्या है? शुरुआती संकेत।

अगर वह दूसरे शहर या देश में है, तो फ़ोन पर भी यह बात हो सकती है। कभी-कभी आमने-सामने से फ़ोन पर कहना आसान होता है।

अगर बात अटपटी हो जाए

हो सकता है बेटी हंस दे। हो सकता है शर्मा जाए और बात बदल दे। हो सकता है कहे, "मम्मी, मुझे सब पता है।" बात अटपटी हो जाए, तो भी ठीक है। पहली बातचीत परफ़ेक्ट नहीं होनी चाहिए। आपने दरवाज़ा खोल दिया, इतना काफ़ी है।

सब कुछ एक बार में समझाना नहीं। एक छोटा सा सच, और बाकी बाद में।

और अगर बात करते हुए आपकी अपनी आँखें भर आएं, तो भी ठीक है। बेटी को यह दिखना कि माँ भी महसूस करती है, उसके लिए एक सीख है। बात के बाद अपने मन को थोड़ा सहलाने के लिए यह अभ्यास सुनिए:

क्या हो अगर बेटी ही आपका सहारा बन जाए?

बहुत सी माँएं डरती हैं कि यह बात बेटी पर बोझ बनेगी। पर क्या हो अगर उल्टा हो? अगर वह रात को पूछ ले, "आज नींद आई?" अगर किसी दिन वह आपके लिए पंखा तेज़ कर दे, बिना पूछे?

घर में बाकी लोगों से बात करनी हो, तो यह भी पढ़िए: पति को मेनोपॉज़ कैसे समझाएं। और अगर मूड लंबे समय से बहुत भारी है, तो डॉक्टर से बात करना भी उतना ही ज़रूरी है जितना बेटी से।

बात से पहले मन घबराए, तो सखी को बताइए। वह उस पल के लिए कोई छोटा अभ्यास सुझा देगी। फिर पांच सांसें, और पहला वाक्य। आज रात खाने के बाद, शायद?

5 मिनट। कोई चटाई नहीं। कोई मंत्र नहीं। बस आप।

महिलाएं अक्सर पूछती हैं

बेटी को मेनोपॉज़ के बारे में कब बताना चाहिए?+

जब वह आपके बदलाव नोटिस करने लगे, या जब आप तैयार हों। कोई एक सही उम्र नहीं है। छोटी बेटी को दो सरल वाक्य काफ़ी हैं, बड़ी बेटी से थोड़ी ज़्यादा बात हो सकती है।

बेटी से मेनोपॉज़ की बात कैसे शुरू करूं?+

एक सीधे वाक्य से: 'मेरे शरीर में कुछ बदलाव हो रहे हैं, इसे पेरिमेनोपॉज़ कहते हैं।' फिर बताइए कि इससे आपको क्या महसूस होता है और उससे क्या मदद चाहिए।

क्या छोटी बेटी को मेनोपॉज़ के बारे में बताना ठीक है?+

हां, उसकी उम्र के हिसाब से। उसे बस इतना बताइए कि यह शरीर का स्वाभाविक बदलाव है, और अगर आप कभी परेशान लगें तो यह उसकी गलती नहीं है।

अगर बेटी बात सुनकर हंस दे या शर्मा जाए तो?+

यह बिल्कुल सामान्य है। बात को ज़बरदस्ती मत खींचिए। आपने दरवाज़ा खोल दिया है, वह अपने समय पर लौटकर पूछ सकती है।

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