मेनोपॉज़ के मिथक और सच: जो बातें हमें गलत बताई गईं
"अभी से? तुम्हारी उम्र में तो हमें कुछ नहीं हुआ था।" "थोड़ा गर्म लगता है तो क्या, सबको लगता है।" "मूड खराब है? ज़्यादा सोचती हो।" ये बातें आपने भी सुनी होंगी। रसोई में, किटी पार्टी में, या किसी शादी में बैठी मौसियों से।
ये बातें ज़्यादातर प्यार से कही जाती हैं। पर इनमें से बहुत सी गलत हैं, और ये औरतों को चुप रहने पर मजबूर करती हैं। आज इन्हें एक-एक करके देखते हैं।
संक्षेप में: मेनोपॉज़ के मिथक अक्सर कहते हैं कि यह 50 के बाद ही होता है, सिर्फ़ हॉट फ्लैश का नाम है, कुछ महीनों में चला जाता है, या मूड का बिगड़ना मन का वहम है। सच यह है कि ज़्यादातर औरतों का मेनोपॉज़ 45 से 55 के बीच होता है, भारत की स्टडीज़ में औसतन 46 से 47 पर, और हॉट फ्लैश औसतन करीब 7 साल तक चल सकते हैं।
मेनोपॉज़ के मिथक: उम्र को लेकर
मिथक: मेनोपॉज़ 50 के बाद ही होता है।
सच: ज़्यादातर औरतों का मेनोपॉज़ 45 से 55 के बीच होता है। ब्रिटेन और अमेरिका में औसत उम्र करीब 51 है, पर भारत की स्टडीज़ में अक्सर इससे पहले, करीब 46 से 47 की उम्र बताई जाती है। और उससे पहले पेरिमेनोपॉज़ का दौर औसतन करीब 4 साल चलता है, कभी कुछ महीने तो कभी 10 साल तक। यानी बदलाव 40 के आसपास या उससे पहले भी शुरू हो सकते हैं।
मिथक: 40 से पहले मेनोपॉज़ हो ही नहीं सकता।
सच: हो सकता है। 45 से पहले हो तो इसे जल्दी मेनोपॉज़ कहते हैं, और 40 से पहले हो तो यह प्रीमैच्योर ओवेरियन इनसफ़िशिएंसी हो सकती है, जो लगभग 100 में से 1 औरत को होती है। अगर 40 से पहले पीरियड्स बंद हो जाएं या बहुत अनियमित हो जाएं, तो डॉक्टर से ज़रूर मिलिए। शुरुआती संकेतों के बारे में पेरिमेनोपॉज़ क्या है में पढ़िए।
मेनोपॉज़ के मिथक: लक्षणों को लेकर
मिथक: मेनोपॉज़ मतलब बस हॉट फ्लैश।
सच: हॉट फ्लैश और रात का पसीना लगभग 4 में से 3 औरतों को होते हैं, पर कहानी यहीं खत्म नहीं होती। नींद का टूटना, घबराहट, दिल की धड़कन तेज़ होना, जोड़ों का दर्द, भूलना, गुस्सा, बालों और त्वचा में बदलाव, ये सब भी इस दौर का हिस्सा हो सकते हैं। पूरी सूची मेनोपॉज़ के लक्षण में है।
मिथक: हॉट फ्लैश कुछ महीनों में चले जाते हैं।
सच: कई औरतों के लिए नहीं। अमेरिका की लंबी चली SWAN स्टडी में हॉट फ्लैश औसतन करीब 7 साल (7.4 साल) तक चले। इसलिए अगर आपको दो साल बाद भी हो रहे हैं, तो आप कुछ गलत नहीं कर रहीं। और अचानक गर्मी लगने पर क्या करें, यह भी पढ़ सकती हैं।
मेनोपॉज़ के मिथक: मन को लेकर
मिथक: मूड का बिगड़ना बस नखरे हैं।
सच: यह मन का वहम नहीं है। SWAN स्टडी में पाया गया कि पेरिमेनोपॉज़ के दौरान डिप्रेशन के लक्षणों का खतरा 2 से 4 गुना तक ज़्यादा होता है। अगर आप उदास हैं, चिड़चिड़ी हैं, या बिना वजह रोना आता है, तो यह सच है, और इसके बारे में डॉक्टर से बात करना बिल्कुल ठीक है। अगर कभी खुद को नुकसान पहुंचाने के ख्याल आएं, तो अभी अपनी स्थानीय इमरजेंसी सेवा या किसी क्राइसिस हेल्पलाइन से संपर्क कीजिए।
मिथक: चुपचाप सह लेना ही ताकत है।
सच: सहना कोई मेडल नहीं है। मदद के रास्ते हैं। हार्मोन थेरेपी कई औरतों के लिए हॉट फ्लैश का सबसे असरदार इलाज है, पर यह हर किसी के लिए सही हो, ज़रूरी नहीं, इसलिए यह बात अपने डॉक्टर से कीजिए। ब्रिटेन की NICE मेनोपॉज़ गाइडेंस, जो 2024 में अपडेट हुई, हॉट फ्लैश, रात के पसीने, नींद और उदास मन के लिए CBT को भी एक विकल्प मानती है। डॉक्टर से बात की तैयारी के लिए डॉक्टर से मेनोपॉज़ की बात वाली सूची देखिए।
मेनोपॉज़ के मिथक: आसान इलाज को लेकर
मिथक: सही सांस या सही संगीत से हॉट फ्लैश बंद हो जाते हैं।
सच: हम यहाँ भी ईमानदार रहेंगे। धीमी सांस पर हुई शुरुआती छोटी स्टडीज़ उम्मीद जगाने वाली थीं, पर 2013 के एक बड़े ट्रायल में हॉट फ्लैश कितनी बार आते हैं, इसमें कोई साफ़ कमी नहीं दिखी। फिर भी धीमी सांस हॉट फ्लैश के बीच आपको शांत और काबू में महसूस करने में मदद कर सकती है। यही उसकी असली ताकत है: वह गर्मी को नहीं, घबराहट को थोड़ा कम कर सकती है।
मेनोपॉज़ के मिथक: ज़िंदगी को लेकर
मिथक: मेनोपॉज़ के बाद औरत की ज़िंदगी ढलान पर है।
सच: मेनोपॉज़ अंत नहीं, एक मोड़ है। नंदिता अपने पॉडकास्ट में कहती हैं कि मेनोपॉज़ कोई परफ़ॉर्मेंस रिव्यू नहीं है जिसमें पास होना है। यह ज़िंदगी का एक दौर है, जो ईमानदारी का हक़दार है।
आपको इस दौर को "ठीक से" निभाने की ज़रूरत नहीं, आपको बस उसके बारे में सच जानने का हक़ चाहिए। क्या हो अगर अगली बार कोई कहे "सबको होता है, सह लो", तो आप मुस्कुराकर कहें, "हाँ, सबको होता है। इसीलिए इसके बारे में बात करनी चाहिए"?
अभी आज़माएं: जब कोई पुरानी बात चुभे, 5 मिनट
- जहाँ हैं वहीं बैठ जाइए, रसोई के स्टूल पर, बिस्तर पर या कार में।
- एक हाथ दिल पर रखिए।
- नाक से चार गिनती तक धीरे सांस लीजिए।
- मुंह से छह गिनती तक लंबी सांस छोड़िए।
- हर सांस छोड़ते हुए मन में कहिए: "जो मैं महसूस कर रही हूँ, वह सच है।"
चार अंदर और छह बाहर, यानी लगभग एक मिनट में छह सांसें। इतनी धीमी सांस को दिल की शांत लय और शरीर की आराम वाली अवस्था से जोड़ा जाता है। आप इसे गलत नहीं कर सकतीं।

MySakhi पेरिमेनोपॉज़ और मेनोपॉज़ से गुज़र रही औरतों के लिए एक मुफ़्त ऐप है, जिसमें छोटे गाइडेड सांस के अभ्यास, नींद की कहानियाँ, 432Hz का सुकून भरा संगीत और सखी है, एक AI साथी जो बताती है कि आज रात क्या मदद कर सकता है। इस बातचीत को आगे बढ़ाना हो तो विश्व मेनोपॉज़ दिवस पर हमारा पन्ना पढ़िए।
कौन सा मिथक आपने सबसे ज़्यादा सुना है? आज उसे किसी एक सहेली के साथ तोड़िए। और अगर मन भारी हो, तो यह महसूस करना ठीक है वाला हिंदी अभ्यास सुनिए, या सखी से बात कीजिए।
5 मिनट। कोई चटाई नहीं। कोई मंत्र नहीं। बस आप।
महिलाएं अक्सर पूछती हैं
मेनोपॉज़ के बारे में सबसे आम मिथक कौन से हैं?+
कि यह 50 के बाद ही होता है, सिर्फ़ हॉट फ्लैश का नाम है, कुछ महीनों में चला जाता है, और मूड का बिगड़ना बस मन का वहम है। ये चारों बातें पूरी तरह सच नहीं हैं।
क्या 40 से पहले मेनोपॉज़ हो सकता है?+
हाँ। 40 से पहले पीरियड्स बंद होना प्रीमैच्योर ओवेरियन इनसफ़िशिएंसी हो सकता है, जो लगभग 100 में से 1 औरत को होती है। ऐसे में डॉक्टर से ज़रूर मिलिए।
हॉट फ्लैश कितने साल तक रहते हैं?+
हर औरत के लिए अलग है। अमेरिका की लंबी चली SWAN स्टडी में हॉट फ्लैश औसतन करीब 7 साल (7.4 साल) तक चले।
क्या मेनोपॉज़ में उदासी सच में हार्मोन से जुड़ी हो सकती है?+
SWAN स्टडी में पाया गया कि पेरिमेनोपॉज़ के दौरान डिप्रेशन के लक्षणों का खतरा 2 से 4 गुना तक ज़्यादा होता है। यह वहम नहीं है, डॉक्टर से बात कीजिए।
क्या सांस के अभ्यास से हॉट फ्लैश बंद हो जाते हैं?+
नहीं, इसका वादा नहीं किया जा सकता। 2013 के एक बड़े ट्रायल में हॉट फ्लैश की गिनती में साफ़ कमी नहीं दिखी। पर धीमी सांस उस पल में शांत और काबू में महसूस करने में मदद कर सकती है।
जहां भी हों, मुफ़्त सुनें