नवरात्रि व्रत और मेनोपॉज़: नौ दिन संभलकर, सांस के साथ
तीसरे दिन की शाम। आप आरती की थाली सजा रही हैं, दीये में घी डाल रही हैं, और अचानक आँखों के आगे हल्का सा अंधेरा छा जाता है। फिर चेहरे पर गर्मी की लहर, माथे पर पसीना। आप चुपचाप दीवार का सहारा लेती हैं और सोचती हैं, "पहले तो नौ दिन आराम से निकल जाते थे। अब ऐसा क्यों?"
और साथ में एक छोटी सी शर्म भी: "मुझसे अब व्रत भी ठीक से नहीं निभता।"
संक्षेप में: मेनोपॉज़ के सालों में नवरात्रि व्रत पहले जैसा आसान न लगे, यह बहुत सी औरतें महसूस करती हैं। अगर आपको डायबिटीज़ है, आप कोई नियमित दवा लेती हैं, या व्रत में चक्कर या बेहोशी जैसा लगता है, तो व्रत से पहले डॉक्टर से बात कीजिए। बाकी के लिए: अगर आपके व्रत में पानी चलता है तो भरपूर पानी, आराम, और रोज़ 5 मिनट की धीमी सांस।
मेनोपॉज़ में नवरात्रि व्रत अलग क्यों लग सकता है?
पेरिमेनोपॉज़ और मेनोपॉज़ में नींद अक्सर टूटी रहती है। हॉट फ्लैश लगभग 4 में से 3 औरतों को होते हैं। थकान जल्दी आती है। ऊपर से नौ दिन का व्रत, सुबह-शाम की पूजा, कन्या पूजन की तैयारी, आते-जाते मेहमान। बहुत सी औरतें बताती हैं कि भूख और थकान में गर्मी की लहर और चिड़चिड़ापन ज़्यादा भारी लगते हैं।
शरीर बदल रहा है, तो उसकी ज़रूरतें भी बदल सकती हैं। इसमें आपकी श्रद्धा कम होने जैसा कुछ नहीं है।
नवरात्रि व्रत से पहले डॉक्टर से कब बात करें?
व्रत शुरू करने से पहले डॉक्टर से ज़रूर पूछिए, अगर:
- आपको डायबिटीज़ है, खासकर अगर आप दवा या इंसुलिन लेती हैं।
- आप ब्लड प्रेशर, थायरॉइड या कोई और नियमित दवा लेती हैं, खासकर ऐसी दवा जो खाने के साथ लेनी होती है।
- पिछले व्रतों में आपको चक्कर आए, बेहोशी जैसा लगा, या बहुत कमज़ोरी हुई।
- आप हाल में कोई नया इलाज शुरू कर रही हैं।
व्रत के बीच अगर चक्कर आएं, आँखों के आगे अंधेरा छाए या दिल बहुत तेज़ धड़के, तो रुक जाइए, बैठ जाइए या लेट जाइए, और कुछ पीजिए या खाइए। ठीक न लगे, या सीने में दर्द, बेहोशी या सांस फूलना हो, तो तुरंत डॉक्टर या इमरजेंसी मदद लीजिए। आपकी सेहत पहले है। डॉक्टर के पास क्या ले जाएं, यह यहां पढ़िए: डॉक्टर से मेनोपॉज़ के बारे में कैसे बात करें।
व्रत का अपना रूप चुनने की इजाज़त
बहुत से घरों में बड़े-बुज़ुर्ग भी कहते आए हैं कि व्रत मन से होता है, शरीर को कष्ट देकर नहीं। इस साल आपका शरीर क्या संभाल सकता है, यह आप तय कर सकती हैं, और ज़रूरत हो तो डॉक्टर के साथ मिलकर।
नौ दिन बिना पानी के खुद को खींचना नहीं। अगर डॉक्टर भी सहमत हों, तो फलाहार वाला व्रत, या एक समय का भोजन, या सिर्फ़ पहले और आखिरी दिन का व्रत।
व्रत का रूप बदलना ठीक है। आपको इसके लिए किसी से माफ़ी मांगने की ज़रूरत नहीं।
कुछ छोटी बातें जो इन नौ दिनों को हल्का कर सकती हैं:
- अगर आपके व्रत में पानी चलता है, तो दिन भर थोड़ा-थोड़ा पीती रहिए।
- दोपहर में 15 मिनट लेटने का समय पहले से तय कर लीजिए।
- गर्म कड़ाही के सामने लंबे समय तक अकेले खड़े रहने की बजाय किसी को साथ बुला लीजिए।
- कन्या पूजन की तैयारी घर में बांट लीजिए। सब कुछ आपको नहीं करना है।
अभी आज़माएं: आरती से पहले 5 मिनट की सांस
- आरती या पूजा से पहले, आसन पर या कुर्सी पर आराम से बैठ जाइए। पीठ सीधी हो, पर अकड़ी नहीं।
- दोनों हथेलियां जोड़कर छाती के पास रखिए, या गोद में ढीली छोड़ दीजिए।
- नाक से 4 गिनती तक सांस लीजिए और 6 गिनती तक धीरे से छोड़िए।
- हर छोड़ती सांस के साथ कंधे और जबड़ा थोड़ा ढीला होने दीजिए। मन भटके, तो दीये की लौ पर लौट आइए।
- 5 मिनट बाद, अगर आपके व्रत में पानी चलता है, तो दो घूंट पानी पीजिए, और फिर आरती शुरू कीजिए।
मन में कोई प्रार्थना चल रही हो, तो चलने दीजिए। न चल रही हो, तो भी ठीक है। आप इसे गलत नहीं कर सकतीं।

गर्मी की लहर पूजा के बीच आए तो?
दीयों और धूप के बीच, भरे कमरे में, हॉट फ्लैश और भारी लग सकता है। धीरे से खिड़की या दरवाज़े के पास चली जाइए, होंठ गोल करके तीन लंबी, ठंडी सांसें छोड़िए। सच यह है कि धीमी सांस हॉट फ्लैश को रोकती नहीं, पर बहुत सी औरतों को उस पल में शांत और संभली हुई महसूस करने में मदद करती है। रसोई और भीड़ के लिए और तरीके यहां हैं: अचानक तेज़ गर्मी लगना: 60 सेकंड की सांस।
अगर हॉट फ्लैश रोज़ की ज़िंदगी पर भारी पड़ रहे हैं, तो त्योहार के बाद डॉक्टर से इलाज के विकल्पों पर बात कीजिए। कई औरतों के लिए हार्मोन थेरेपी सबसे असरदार इलाज है, पर यह फ़ैसला डॉक्टर के साथ ही होना चाहिए।
नौ दिन, नौ छोटे पल
हर दिन पूरा 5 मिनट न मिले, तो भी ठीक है। सुबह पूजा से पहले, दोपहर को खिड़की के पास, शाम को गरबा या जगराते से पहले, कहीं भी तीन लंबी सांसें। और अष्टमी-नवमी की भागदौड़ के बाद जल्दी सो जाने की पूरी इजाज़त है। नवरात्रि के बाद दिवाली की तैयारी भी ज़्यादा दूर नहीं होती, उसके लिए यह पढ़िए: दिवाली की थकान और मेनोपॉज़।
क्या हो अगर इस नवरात्रि आपका व्रत थोड़ा अपने शरीर के लिए भी हो?
पूजा के बाद, जब घर शांत हो जाए, मैं यहाँ हूँ: हिंदी अभ्यास चला लीजिए, या MySakhi का संगीत Spotify पर सुनिए।
5 मिनट। कोई चटाई नहीं। कोई मंत्र नहीं। बस आप।
महिलाएं अक्सर पूछती हैं
क्या मेनोपॉज़ में नवरात्रि व्रत रखना ठीक है?+
बहुत सी औरतें रखती हैं, पर शरीर की सुनना ज़रूरी है। अगर आपको डायबिटीज़ है, आप नियमित दवा लेती हैं, या व्रत में चक्कर आते हैं, तो पहले डॉक्टर से बात कीजिए।
व्रत में चक्कर आएं तो क्या करें?+
तुरंत बैठ जाइए या लेट जाइए, और कुछ पीजिए या खाइए। ठीक न लगे, या सीने में दर्द, बेहोशी या सांस फूलना हो, तो तुरंत डॉक्टर या इमरजेंसी मदद लीजिए।
व्रत में हॉट फ्लैश ज़्यादा क्यों लगते हैं?+
बहुत सी औरतें बताती हैं कि भूख, थकान और दीयों व रसोई की गर्मी में हॉट फ्लैश ज़्यादा भारी लगते हैं। धीमी सांस उस पल में शांत रहने में मदद कर सकती है, पर यह उन्हें रोकती नहीं।
डायबिटीज़ हो तो नवरात्रि व्रत कैसे रखें?+
व्रत से पहले डॉक्टर से ज़रूर पूछिए, खासकर दवा या इंसुलिन के समय के बारे में। डॉक्टर बता सकते हैं कि आपके लिए कौन सा व्रत सुरक्षित है।
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